कर्णप्रयाग/चमोली (अंकित तिवारी): राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में हिमालय दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राम अवतार सिंह द्वारा हिमालय संरक्षण की शपथ ली गई। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों, और छात्रों को हिमालय की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया और शपथ दिलाई कि वे इस अनमोल धरोहर की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राम अवतार सिंह ने कहा कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था, और जीवन का आधार है। यहाँ से निकलने वाली नदियाँ, वन्य जीव, वृक्ष-वनस्पतियां और दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ हमारे जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि इनकी सुरक्षा हम सभी का कर्तव्य और जिम्मेदारी है। हमें स्वयं जागरूक होना चाहिए और अपने आस-पास के लोगों को भी पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के बारे में सूचित करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. आर. सी. भट्ट ने बताया कि इस वर्ष हिमालय दिवस की कोई आधिकारिक थीम घोषित नहीं की गई है, लेकिन उत्तराखंड में “हिमालय की आपदाएं” के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में आई प्राकृतिक आपदाएं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई हैं। हिमालय क्षेत्र में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारणों को समझना और उनके अनुसार कार्यक्रमों का संचालन करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक और कर्मचारी शामिल हुए। इसमें डॉ. अखिलेश कुकरेती, डॉ. एम. एस. कंडारी, डॉ. बी. सी. एस. नेगी, डॉ. राधा रावत, डॉ. चन्द्रावती टम्टा, डॉ. कविता पाठक, डॉ. इन्द्रेश कुमार पाण्डेय, डॉ. रूपेश कुमार श्रीवास्तव, कमलेश चन्द्र लोहनी, डॉ. एच. सी. रतूड़ी, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. एम. एल. शर्मा, डॉ. भरत लाल बैंरवाण, डॉ. कीर्तिराम डंगवाल, डॉ. हरीश बहुगुणा, डॉ. दिशा शर्मा समेत महाविद्यालय के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भी हिमालय संरक्षण की शपथ ली।
इस कार्यक्रम के माध्यम से कालेज प्रशासन ने यह संदेश दिया कि हिमालय के संरक्षण के लिए हम सभी को जागरूक और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।





