ऋषिकेश(अंकित तिवारी): पं0 ललित मोहन शर्मा परिसर, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानन्द सभागार में आज संविधान दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सबसे पहले राष्ट्रीय गीत ‘‘वन्दे मातरम्’’ का सामूहिक गायन हुआ, जिससे राष्ट्र की एकता और देशभक्ति की भावना को और बल मिला।
समारोह का शुभारम्भ करते हुए परिसर निदेशक प्रो0 महाबीर सिंह रावत ने सभी उपस्थित शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, “संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और आदर्शों का प्रतीक है। यह हमें अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी याद दिलाता है।”
प्रो0 रावत ने वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन को राष्ट्रीय गौरव और एकता का प्रतीक बताते हुए उपस्थित सभी को संविधान में निहित सर्वोच्च मूल्यों को आत्मसात करने और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर इतिहास विभाग की शोध छात्रा नाजिया अंसारी ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया पर अपने विचार व्यक्त किए। राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो0 डी0के0पी0 चौधरी ने संविधान दिवस के महत्व को समझाते हुए बताया कि यह दिन उस कठिन सफर की याद दिलाता है, जब हमारे महान नेताओं ने मिलकर भारत का संविधान तैयार किया, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन कर रहा है।
प्रो0 दिनेश शर्मा ने संविधान के विभिन्न बिंदुओं को अन्य देशों के संविधान से जोड़ते हुए उनकी महत्ता पर प्रकाश डाला और साथ ही प्राचीन भारत में इन मूल्यों के विकास की व्याख्या की। वहीं, हिंदी विभाग के प्रो0 मुक्तिनाथ यादव ने डॉ0 भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद किया और संवैधानिक मूल्यों पर बल दिया।
इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो0 संगीता मिश्रा ने संविधान को अमूल्य निधि बताते हुए कहा कि इसके आदर्शों को हर नागरिक को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
इस कार्यक्रम में परिसर के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारीगण, एनसीसी कैडेट्स और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन प्रो0 अधीर कुमार के द्वारा किया गया।
संविधान दिवस के इस अवसर पर आयोजित इस समारोह ने सभी को भारतीय संविधान के मूल्यों के प्रति जागरूक किया और देशभक्ति की भावना को प्रबल किया।






