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एम्स ऋषिकेश में बिना सर्जरी के हृदय के वाल्व की लीकेज का सफल इलाज, 65 वर्षीय वृद्ध को मिला नया जीवन

टीईईआर तकनीक का उपयोग कर कार्डियोलॉजिस्टों ने किया माइट्रल वाल्व रिपेयर, बिना ओपन हार्ट सर्जरी के स्वास्थ्य में सुधार

ऋषिकेश(अंकित तिवारी): एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने 65 वर्षीय वृद्ध को जीवनदायिनी उपचार प्रदान किया है। इस व्यक्ति का हृदय पहले ही एक गंभीर अवस्था में था, जहां माइट्रल वाल्व में लीकेज की वजह से हृदय की पंपिंग क्षमता महज 20 प्रतिशत रह गई थी। यह व्यक्ति पहले ही 2023 में स्टंट लगवा चुका था, और अब उसकी सांस फूलने तथा चलने-फिरने में दिक्कतें बढ़ चुकी थीं। हरिद्वार के चिकित्सालयों ने बताया था कि उसके हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज (सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन) हो गया है, और सर्जरी की आवश्यकता है।

मगर, उम्र ज्यादा होने और पहले से हार्ट सर्जरी होने के कारण, ओपन हार्ट सर्जरी करना एक जोखिम भरा कदम था। ऐसे में, रोगी ने एम्स ऋषिकेश का रुख किया, जहां कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने उसे टीईईआर (Transcatheter Edge-to-Edge Repair) तकनीक से इलाज करने का निर्णय लिया। यह एक अत्याधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें बिना सर्जरी के माइट्रल वाल्व की लीकेज को ठीक किया जाता है।

टीईईआर विधि के माध्यम से, जांघ की रक्त नली से एक छोटी क्लिप हृदय तक पहुंचाई गई, जो माइट्रल वाल्व के लीकेज हिस्सों को आपस में जोड़ कर रक्त के उल्टे प्रवाह को कम कर देती है। इस प्रक्रिया से रोगी की हृदय कार्यक्षमता में सुधार हुआ और सांस फूलने, थकान जैसे लक्षणों में राहत मिली। अब वह रोगी पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा है और हाल ही में अस्पताल से छुट्टी पा चुका है।

टीईईआर तकनीक का महत्व:
टीईईआर तकनीक, बिना छाती खोले और केवल रक्त नली के माध्यम से हृदय तक क्लिप पहुंचाकर माइट्रल वाल्व की लीकेज को सुधारने का एक अभिनव तरीका है। इस प्रक्रिया के बाद रोगी को जल्दी स्वस्थ होने का मौका मिलता है, जिससे उसे कम समय में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।

एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजिस्ट एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बरूण कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया से हृदय की पंपिंग क्षमता में सुधार हुआ और मरीज की जीवनशक्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। “यह प्रक्रिया न केवल रोगी के लिए एक राहत थी, बल्कि यह एम्स ऋषिकेश की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और तकनीकों का प्रमाण भी है, जो जटिल हृदय रोगों का इलाज बिना ओपन हार्ट सर्जरी के संभव बना रही हैं।”

इस प्रक्रिया में डॉ. बरूण के साथ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुवेन कुमार, सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी और एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार भी शामिल थे।

एम्स ऋषिकेश के कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा:
“यह उपलब्धि हमारे संस्थान में उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और उच्च गुणवत्ता वाले हृदय रोग उपचार का प्रमाण है। यह साबित करता है कि जटिल हृदय रोगों का इलाज अब ओपन हार्ट सर्जरी के बिना भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। हमारी टीम के डॉक्टरों ने शानदार काम किया है, और हमारे द्वारा इस्तेमाल की जा रही नई तकनीकों से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में बड़ा सुधार हो रहा है।”

इस तकनीक की सफलता से यह स्पष्ट है कि भविष्य में हृदय के जटिल मामलों का इलाज बिना सर्जरी के भी संभव होगा, जिससे और अधिक जीवनों को बचाया जा सकेगा।

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