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साईं सृजन पटल ने हर्षोल्लास से मनाया लोहड़ी का त्योहार

देहरादून(अंकित तिवारी)। साईं सृजन पटल के तत्वावधान में मंगलवार रात्रि को आर.के.पुरम, जोगीवाला स्थित साईं कुटीर के प्रांगण में लोहड़ी का पर्व अत्यंत धूमधाम, उत्साह और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी उपस्थित रहे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ लोकपर्व की गरिमा को जीवंत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत साईं सृजन पटल के संस्थापक प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ द्वारा सभी उपस्थित जनों को लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं देने के साथ हुई। उन्होंने लोहड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व साहस, परोपकार और सामाजिक न्याय के प्रतीक वीर योद्धा दुल्ला भट्टी की स्मृति से जुड़ा हुआ है। दुल्ला भट्टी ने मुगल शासन के अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई और अपहृत बालिकाओं को मुक्त कराकर उनका विवाह करवाया, जिसके कारण उन्हें लोकनायक के रूप में जाना जाता है। इसी वीरता की स्मृति में लोहड़ी के अवसर पर पारंपरिक गीत — “सुंदरी-मुंदरी होय, तेरा कौण विचारा होय, दुल्ला भट्टी वाला होय” — गाया जाता है।

प्रो. तलवाड़ ने पर्व के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि लोहड़ी का दिन सूर्य देव के उत्तरायण होने का संकेत देता है। इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप दिन लंबे होने लगते हैं और शीत ऋतु की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगती है। लोहड़ी के माध्यम से सूर्य देव और अग्निदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

कार्यक्रम के दौरान लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित की गई, जिसमें मूंगफली, रेवड़ी और मक्की के भुने दाने अर्पित किए गए। उपस्थित लोगों ने अग्नि की परिक्रमा कर अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात प्रसाद के रूप में मूंगफली, रेवड़ी और मक्की के दानों का वितरण किया गया।

विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि पंजाबी समाज में जिन परिवारों में हाल ही में विवाह संपन्न हुआ हो या शिशु का जन्म हुआ हो, वहां लोहड़ी का उत्सव और भी अधिक भव्यता के साथ मनाया जाता है, जो इस पर्व को पारिवारिक उल्लास और सामाजिक एकता से जोड़ता है।

इस अवसर पर कॉलोनी की अध्यक्ष डॉ. कमलेश भारती, कमला चौहान, नीलम तलवाड़, मोहन चंद्र लोहनी, मनोज ऐर, अक्षत तलवाड़ सहित  कॉलोनीवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक समरसता और लोक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।

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