पौड़ी(अंकित तिवारी)। डॉ. बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी में संस्कृत विभाग की ओर से सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ किया गया। सप्ताह के दौरान संस्कृत भाषा, साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिवस “समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में संस्कृत की प्रासंगिकता” विषय पर मुख्य वक्ता प्रो. पी. वी. बी. सुब्रमण्यम, निदेशक, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग ने व्याख्यान दिया। उन्होंने समकालीन वैश्विक परिदृश्य में संस्कृत की भूमिका और प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. सुब्रमण्यम ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा बताते हुए इसके अध्ययन की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल भाषा और साहित्य तक सीमित न रखते हुए दर्शन, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान तथा विभिन्न अंतर्विषयी क्षेत्रों के अध्ययन से जोड़ने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. अनूप डोबरियाल उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. यू. सी. गैरोला, निदेशक, डॉ. बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी, प्रो. कुसुम डोबरियाल, प्रो. अनीता रुदोला तथा प्रो. एस. सी. गैरोला की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र पांडेय ने किया। उन्होंने संस्कृत सप्ताह के आयोजन के उद्देश्यों तथा सात दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बालकृष्ण बडानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, विशिष्ट अतिथि, परिसर निदेशक, उपस्थित प्राध्यापकों, विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में परिसर के शिक्षक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संस्कृत सप्ताह के आगामी छह दिनों में भी विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा संस्कृत भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विविध विषयों पर व्याख्यान दिए जाएंगे।
संस्कृत विभाग, डॉ. बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी द्वारा आयोजित यह सात दिवसीय कार्यक्रम हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।




