देहरादून(अंकित तिवारी)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री सनातन धर्म मंदिर, नेहरू कॉलोनी, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के प्रथम दिवस भक्त शिरोमणि मीराबाई के जीवन, संघर्ष और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति पर आधारित भव्य नाट्य लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।
श्रीधाम वृंदावन के अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पूज्य पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज के सानिध्य में प्रस्तुत इस नाट्य लीला ने मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक भावों से अभिभूत कर दिया।
कलाकारों ने मीराबाई के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली अभिनय, संवाद और भक्तिमय भजनों के माध्यम से मंच पर सजीव कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति मीराबाई का अटूट प्रेम, अनन्य भक्ति, त्याग, संघर्ष और पूर्ण समर्पण प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण रहा। मीराबाई के जीवन की आध्यात्मिक यात्रा को देखकर श्रद्धालु देर तक भाव-विभोर रहे।
इस अवसर पर पूज्य पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज ने कहा कि मीराबाई का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में जब पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न होता है, तब भक्त और भगवान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है। मीराबाई का जीवन त्याग, प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल है, जो युगों-युगों तक समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देती रहेगी।
नाट्य लीला के दौरान जब मीराबाई की कृष्ण के प्रति अटूट आस्था और समर्पण के प्रसंग मंचित हुए तो पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर नाट्य प्रस्तुति का आनंद लिया और कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय की सराहना की।
महोत्सव के प्रथम दिवस का समापन भगवान श्रीराधा-कृष्ण की भव्य आरती के साथ हुआ। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
श्री सनातन धर्म मंदिर समिति, देहरादून द्वारा आयोजित यह जन्माष्टमी महोत्सव धार्मिक आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर संगम बनकर श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा।


