पौड़ी(अंकित तिवारी)। डॉ. बी.जी.आर. (बेजवाड़ा गोपाल रेड्डी) परिसर, पौड़ी में 14 सितम्बर 2026 को हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी राजभाषा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के साथ ही हिन्दी पखवाड़े का भी विधिवत शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में हिन्दी के ऐतिहासिक, संवैधानिक, साहित्यिक, व्यावहारिक एवं वैश्विक स्वरूप पर वक्ताओं ने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. उमेश चन्द्र गैरोला ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में भूगोल विभाग की प्रो. अनीता रूडोला तथा इतिहास विभाग की प्रो. रेहाना जैदी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के संयोजक संस्कृत विभाग के डॉ. दिनेश चन्द्र पाण्डेय तथा संचालन हिन्दी विभाग के डॉ. नवनीत ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अध्यक्ष प्रो. उमेश चन्द्र गैरोला का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए हिन्दी विभाग की डॉ. नीतू यादव ने हिन्दी भाषा के इतिहास, संवैधानिक स्थिति और विभिन्न आयामों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने हिन्दी के विकास-क्रम तथा भारतीय राजभाषा के रूप में उसके महत्त्व को विस्तार से रेखांकित किया।
डॉ. बिमला चमोला ने हिन्दी साहित्य के विकास में भाषा की भूमिका तथा उसकी समृद्ध साहित्यिक परम्परा पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिन्दी साहित्य के सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों को रेखांकित करते हुए भाषा के व्यापक प्रभाव की चर्चा की। वहीं अंग्रेजी विभाग के डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने हिन्दी के व्यावहारिक पक्ष पर विचार रखते हुए दैनिक जीवन, शिक्षा एवं सामाजिक व्यवहार में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। अंशुल एवं माधव ने हिन्दी भाषा के विकास, प्रयोग तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों के वक्तव्यों ने कार्यक्रम को संवादात्मक एवं सहभागितापूर्ण स्वरूप प्रदान किया।
अतिथि उद्बोधन में प्रो. अनीता रूडोला ने हिन्दी के वैश्विक स्वरूप तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी की उपयोगिता और संभावनाओं को रेखांकित किया। प्रो. रेहाना जैदी ने हिन्दी के साहित्यिक स्वरूप, ऐतिहासिक विकास तथा विभिन्न कालखंडों में हिन्दी के प्रयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हिन्दी की समृद्ध परम्परा को रेखांकित करते हुए भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में परिसर निदेशक प्रो. उमेश चन्द्र गैरोला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान का भी महत्वपूर्ण आधार है।
समग्र रूप से कार्यक्रम हिन्दी भाषा के इतिहास, संविधान, साहित्य, व्यवहार और वैश्विक विस्तार को समझने की दिशा में सार्थक एवं ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग तथा उसके प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।




