देहरादून
2 अक्टूबर 1995 को मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर एक 16 वर्षीय युवक राजधानी देहरादून की सड़कों पर उत्तराखंड आंदोलनकारी के रूप में अपनी हिस्सेदारी निभा रहा था। उम्र के इस पड़ाव पर कक्षा 11 का वह विद्यार्थी पुलिस की लाठी से घायल होकर रिस्पना पुल से नीचे गिर गया। रीढ़ की हड्डी टूट गई और गर्दन से नीचे का शरीर निष्क्रिय हो गया। पुलिस ने पहले कोरोनेशन अस्पताल देहरादून और फिर चंडीगढ़ में उपचार कराया। दवाएं आज तीन दशक बाद भी लगातार चल रही हैं ;लेकिन गर्दन से नीचे का शरीर आज भी निष्क्रिय है।
….हाथ कलम को उठा नहीं सकते, नाक पर बैठी मक्खी को भगा नहीं सकते। पांव थिरक नहीं सकते हैं। अपने दैनिक क्रियाकलापों के लिए भी सहायक की जरूरत पड़ती है। तीन दशक से यह आंदोलनकारी मानो सरशैय्या पर लेटा है। कुछ वर्षों से व्हीलचेयर पर भी बैठा रहता है। अपने दैनिक कार्यों के लिए 80 वर्षीय वृद्ध माताजी व सहायकों पर निर्भर है। उत्तराखंड आंदोलन की भेंट पूरा जीवन चढ़ गया, करियर समाप्त हो गया, चलने फिरने को लाचार हो गए, घर गृहस्थी तो दूर की बात……लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी। और प्रसन्न मन से उत्तराखंड की उन्नति को अपनी आंखों से आज भी देख रहे हैं। स्वस्थ मन है, आंख, कान, वाणी और मस्तिष्क हमसे भी अधिक सक्रिय, हमसे भी अधिक ऊर्जावान, हमसे भी अधिक आशावादी, हमसे भी अधिक सृजनकारी है।
धरमपुर, देहरादून के प्रगति विहार की गली नंबर 4 में आपका आवास है। प्रगति विहार का हर घर, हर परिवार आपको जानता है, पहचानता है, आपके सहयोग के लिए हर समय तत्पर रहता है। उत्तराखंड के हर जिले के नेता, अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता आपसे मिलने आते हैं, आपके सुख-दुख की चिंता करते हैं। और आपको बारंबार सैल्यूट करते हैं।
आपके पूज्य पिताजी का निधन 2015 में हो गया था। उनकी पेंशन की धनराशि और उत्तराखंड आंदोलनकारी पेंशन मिलाकर आपकी दवा और आपके सहायकों का और घर का खर्चा चलता है। समय का सदुपयोग करने और प्रदेश, देश दुनिया की ख़बरों से अपडेट रहने के लिए टेक्नोलॉजी का आप भरपूर उपयोग करते हैं। वॉइस ऐप से आप लैपटॉप पर सोशल मीडिया का सुख और जानकारी प्राप्त करते हैं। आपके सहायक लैपटॉप आपकी मेज पर रख देते हैं, हेडफोन लगा देते हैं और आप….
…….आपसे मिलकर हमें भी ऊर्जा मिली। आज अपने मित्र संजीव कुमार तिवारी जी के साथ आपके आवास पर जाना हुआ। आपसे मुलाकात हुई। आपसे तीन घंटे तक हर मुद्दे पर बेबाक बातचीत हुई। आपकी सक्रियता आपकी समझ, आपके तार्किक चिंतन, उत्तराखंड के लिए आपके प्रेम, समर्पण, प्लानिंग के लिए बारंबार सैल्यूट।उत्तराखंड की प्रगति में ही आप अपनी प्रगति समझ रहे हैं। उत्तराखंड की खुशहाली में ही आप अपनी अपने दुखों को भूल जाते हैं। आपका कहना है कि उत्तराखंड के शहीदों की शहादत को ध्यान में रखकर हमें इस उत्तराखंड के नवनिर्माण के लिए की जान से प्रयास करना चाहिए।
……… अंत में एक बात मन को अंदर तक दर्द दे गई, आँखों को नम कर गई। *गत वर्ष उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने उत्तराखंड आंदोलन में पूर्ण रूप से दिव्यांग हुए शैय्या ग्रस्त आंदोलनकारियों की पेंशन ₹20000 से ₹30000 करने का आश्वासन दिया था और मेडिकल अटेंडेंट देने का आश्वासन दिया था। बस यहीं पर थोड़ा कमी रह गई है कि आपको यह सुविधा अभी नहीं मिल पाई है। उत्तराखंड केसंवेदनशील सहृदय मुख्यमंत्री जी से उम्मीद की जानी चाहिए कि इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस से पूर्व आप अपना वादा निभाएंगे और उत्तराखंड के इन नायकों के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे। उत्तराखंड के इन जीवित शहीदों को बारंबार नमन।
…… तीन दशक से शैय्या और व्हीलचेयर के सहारे जीवन जीने वाले, मजबूत इरादों वाले अमित ओबरॉय जी को नमन, वंदन और अभिनंदन। श्री अमित ओबरॉय जी से हुई मुलाकात का वीडियो जल्दी ही प्रसारित किया जाएगा। धन्यवाद दोस्तों।
…. जगदीश ग्रामीण की कलम से






