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गणतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक का योगदान जरूरी : प्रो. ए. एस. उनियाल

देहरादून : गणतंत्र दिवस का दिन न केवल राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह हम सभी के लिए आत्ममूल्यांकन और संकल्प लेने का अवसर भी है। इस वर्ष 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित एक समारोह में उच्च शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त निदेशक, प्रो. ए. एस. उनियाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस ऐतिहासिक मौके पर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों, वीरांगनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों के प्रति भी अपना सम्मान व्यक्त किया।

प्रो. ए. एस. उनियाल ने अपने संबोधन में कहा, “गणतंत्र दिवस हम सभी के लिए आत्मावलोकन का पर्व है। यह हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर देता है।” उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे भारत के गणतंत्र की स्थापना के मूल्यों, उद्देश्यों और आदर्शों को आत्मसात करें और उनका पालन करें। वे यह भी बोले कि यदि हमारे देश को मजबूत और समृद्ध बनाना है, तो प्रत्येक नागरिक को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में निष्ठापूर्वक अपनी भूमिका निभानी होगी।

 

राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका
प्रो. उनियाल ने विशेष रूप से शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत संस्थान राष्ट्र और प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन संस्थानों के प्रबुद्ध विद्वान समाज को दिशा प्रदान करते हैं और हमारे युवा समाज के भविष्य को आकार देते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए उन्होंने सभी से निष्ठापूर्वक योगदान की अपील की।

नैतिक मूल्यों के साथ विकास की दिशा
कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “विगत वर्षों में हम शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। अब हमारा लक्ष्य नैतिक मूल्यों के साथ ज्ञान, कौशल और निपुणता के शिखर तक पहुंचना है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संचालित योजनाओं – ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’, और ‘फिट इंडिया’ के बारे में भी चर्चा की और युवाओं से इन योजनाओं में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

समाज के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य
उपनिदेशक प्रो. ममता नैथानी ने कहा, “हमें समाज में प्रचलित कुरीतियों और अंधविश्वासों को दूर करने के लिए ज्ञान और चेतना का प्रचार करना चाहिए।” उन्होंने भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा और जागरूकता को प्रमुख साधन बताया।

वहीं, सहायक निदेशक प्रो. दीपक कुमार पाण्डेय ने विद्यार्थियों से अनुरोध किया कि वे अनुशासन और पूरी मेहनत से अपनी पढ़ाई करें, ताकि वे अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निभा सकें और भारतीय गणतंत्र को उच्चतम शिखर पर पहुंचा सकें।

प्रो. प्रभात द्विवेदी, प्रो. वी. पी. श्रीवास्तव, और प्रो. दीपा मेहरा रावत जैसे प्रमुख शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए।

संकल्प और भविष्य का रास्ता
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण से करेंगे, ताकि भारतीय गणतंत्र को सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित किया जा सके। इस मौके पर प्रो. आर. एम. पटेल, भूपेंद्र सिंह रावत सहित कई शिक्षक एवं क्षेत्रीय कार्यालय उच्च शिक्षा का स्टाफ भी मौजूद रहा।

गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमारी सफलता का आधार हमारे नागरिकों की जिम्मेदारी, उनका निष्ठा से किया गया योगदान और हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता है। आज के युवाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि एक मजबूत गणतंत्र केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं, बल्कि हर नागरिक के समर्पण और कठिन परिश्रम से बनता है। जैसे प्रो. उनियाल ने कहा, “हमारा गणतंत्र तभी मजबूत रह सकता है, जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निभाए।” यही भावना हमें अपने जीवन में उतारनी होगी, ताकि हम राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपना सार्थक योगदान दे सकें।

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