डोईवाला: ‘साईं सृजन पटल’ पत्रिका के सत्रहवें अंक का विमोचन पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. जे.सी. घिल्डियाल के हाथों हुआ। इस अवसर पर प्रो. घिल्डियाल ने पत्रिका की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल साहित्य और संस्कृति को एक नई दिशा देता है, बल्कि युवाओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि साईं सृजन पटल साहित्य और शिक्षा के संगम से समाज के उत्थान की बात करता है, पत्रिका के उद्देश्यों को पूरी तरह से उजागर करता है। प्रो. घिल्डियाल ने कहा कि ‘साईं सृजन पटल’ के माध्यम से युवाओं को अपनी सोच और विचार साझा करने का एक आदर्श मंच मिलता है, जो समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है। इस अंक में समाज के विविध पहलुओं पर गहरी दृष्टि डाली गई है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता को पूर्ण करता है।
पत्रिका के मुख्य संपादक प्रो. के.एल. तलवाड़ ने भी इस अंक को एक महत्वपूर्ण पहल माना। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि इस अंक में शिक्षा और साहित्य पर विचार-विमर्श के साथ-साथ समाज के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर किया गया है। हम इसे निरंतर समृद्ध और प्रेरणादायक बनाने के लिए कार्यरत हैं।”
‘साईं सृजन पटल’ का यह सत्रहवां अंक न केवल साहित्य और शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता का संचार भी करता है। यह अंक न केवल लेखकों के लिए एक मंच है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता को भी उजागर करता है। इसके माध्यम से हम देख सकते हैं कि किस प्रकार साहित्य समाज के हर क्षेत्र में एक प्रकाश स्तंभ की तरह कार्य कर सकता है।
पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने बताया कि इस अंक में कई नए और विचारपूर्ण लेखों का समावेश किया गया है, जो समाज के विभिन्न विषयों पर गहरी सोच उत्पन्न करते हैं। उनका मानना है कि इस अंक के माध्यम से पाठकों को न केवल ज्ञान मिलेगा, बल्कि यह अंक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक सिद्ध होगा।उन्होंने कहा कि आज के समय में साहित्य और शिक्षा का मेल समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आज का युवा, जो तकनीकी दृष्टि से सक्षम है, उसे साहित्य के माध्यम से अपनी सोच और दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का अवसर मिल रहा है। यही अवसर ‘साईं सृजन पटल’ पत्रिका अपने पाठकों को प्रदान कर रही है, जिससे न केवल लेखकों का उत्साहवर्धन हो रहा है, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श का एक स्वस्थ वातावरण भी उत्पन्न हो रहा है।
इस मौके पर विभा घिल्डियाल और हेमंत हुरला की उपस्थिति ने इस विमोचन समारोह को और भी प्रभावशाली बना दिया। इस आयोजन ने पत्रिका की महत्ता को और स्पष्ट किया और दर्शाया कि साहित्य न केवल साहित्यकारों, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।




