डोईवाला: साईं सृजन पटल के संस्थापक प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने अपने रिटायरमेंट के बाद सृजनात्मकता और नवाचार के क्षेत्र में एक नई दिशा दी है। उनका मानना है कि बिना विचारों के न तो नवाचार संभव है, न प्रगति।
यही कारण है कि उनका मन नए-नए विचारों से हमेशा भरा रहता है। उनके शब्दों में, “जितने अधिक विचार जन्म लेंगे, उतनी ही अधिक संभावनाएं सामने आएंगी।”
प्रो. तलवाड़ के प्रयोगों का सबसे बड़ा उदाहरण उनके पुराने टेबल कैलेंडर के उपयोग से जुड़ा है। उन्होंने पुराने टेबल कैलेंडर को नया रूप देते हुए उसे रचनात्मकता और नवाचार का प्रतीक बना दिया।
अपनी मासिक पत्रिका के विमोचन और पहले स्थापना दिवस की स्मृतियों को कैलेंडर के माध्यम से जीवंत बना दिया है। इससे यह साबित होता है कि रचनात्मकता में हर वस्तु का नया रूप देने की शक्ति है, और कुछ भी बेकार नहीं होता।
प्रो. तलवाड़ का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति सचमुच नई खोज करना चाहता है, तो उसे अच्छे विचारों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि जितना हो सके, उतने विचारों को जन्म देना चाहिए।
यही कारण है कि उनका मानना है कि महान खोज किसी एक चमकदार विचार से नहीं, बल्कि असंख्य छोटे-बड़े विचारों की भीड़ से होती है।
उनके शिष्य, अंकित तिवारी, जो साईं सृजन पटल के उपसंपादक भी हैं, बताते हैं कि प्रो. तलवाड़ हमेशा सार्थक विचारों पर अपना समय और ऊर्जा केंद्रित करते हैं।
वे कहते हैं, “प्रो. तलवाड़ से हमें हमेशा यह सिखने को मिला है कि नए विचारों को आजमाने से कभी डरना नहीं चाहिए। हर विचार महत्वपूर्ण है, क्योंकि वही अगले बेहतर विचार की नींव बन सकता है।”
तिवारी के अनुसार, “रचनात्मकता केवल कल्पना नहीं है और सफलता केवल मेहनत नहीं है। इन दोनों को जोड़ने वाला पुल विवेक है।” प्रो. तलवाड़ का यह आदर्श हमें यह सिखाता है कि रचनात्मकता और नवाचार सिर्फ सोच से नहीं, बल्कि हर विचार को सच में बदलने के प्रयास से उत्पन्न होते हैं।
प्रो. तलवाड़ की इस नई सोच और विचारशीलता ने साईं सृजन पटल को एक नया रूप दिया है, जिसमें रचनात्मकता और नवाचार का हर कदम महत्वपूर्ण है।













