कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला के तहत ‘भारत के लिए बांग्लादेश में उत्पन्न अस्थिरता के मायने’ विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह के उद्घाटन वक्तव्य से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने इस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया और इसे उच्च शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस श्रृंखला का आठवां व्याख्यान राजकीय महाविद्यालय जखोली के डॉ. विकास शुक्ला ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने व्याख्यान में दक्षिण एशिया में भारतीय कूटनीति के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. शुक्ला ने बांग्लादेश में उत्पन्न अस्थिरता के कारणों का गहराई से विश्लेषण किया और इस क्षेत्र में भारत की सुरक्षा व रणनीतिक स्थिति को समझाया। उन्होंने बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता के कारणों के साथ-साथ सुपरपावर्स के भूमिका को भी उजागर किया, जिनका इस संकट में अहम योगदान रहा है।
डॉ. शुक्ला ने आगे यह भी बताया कि बांग्लादेश में उत्पन्न होने वाली अस्थिरता से भारतीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस विषय पर उन्होंने भारत के कूटनीतिक प्रयासों और भारत विरोधी घटनाक्रमों के कारण होने वाले तनाव को कम करने के लिए किए गए संघर्षों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अस्थिरता से भारत को विभिन्न सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक समाधान आवश्यक है।
व्याख्यान के अंत में डॉ. शुक्ला ने छात्रों और शिक्षकों के प्रश्नों का उत्तर दिया और इस मुद्दे पर खुलकर विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार पाण्डेय ने किया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक और विभिन्न अन्य महाविद्यालयों के शिक्षक और छात्र भी जुड़े।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. कविता पाठक ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया और इस उत्कृष्ट कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कर्णप्रयाग महाविद्यालय को बधाई दी।
इस व्याख्यान ने न केवल बांग्लादेश की अस्थिरता पर विचार प्रस्तुत किया, बल्कि इस क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक भूमिका की अहमियत को भी स्पष्ट किया।




