ऋषिकेश(अंकित तिवारी):यह एक प्रेरणा देने वाली घटना है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन को बचाया। 42 वर्षीय रघु पासवान, जो ऋषिकेश के निवासी थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके अंगों से 5 अन्य लोगों की जिंदगी बचाई जा सकी। रघु ने न केवल अंगदान किया, बल्कि नेत्रदान भी किया, जिससे दो और लोग दुनिया देख सकेंगे। एम्स ऋषिकेश में यह केडवरिक ऑर्गन डोनेशन प्रक्रिया शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह एम्स ऋषिकेश में अंगदान का दूसरा मामला है।
रघु का परिवार मूल रूप से बिहार का है और वह एक राजमिस्त्री का काम करते थे। कुछ दिन पहले हुई एक दुर्घटना के बाद, रघुवीर को गंभीर चोटें आईं। उन्हें एम्स में भर्ती किया गया, लेकिन उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और वह ब्रेन डेड हो गए। चिकित्सकों की एक समिति ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद, एम्स की टीम ने रघुवीर के परिवार से संपर्क किया और उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया। ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान ने भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भूमिका निभाई और परिवार को अंगदान के महत्व के बारे में बताया।
रघु के परिवार के राजी होने के बाद, उनकी सहमति से अंगदान की प्रक्रिया को शुरू किया गया। इस प्रक्रिया के बाद रघुवीर के अंगों को 5 अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया, जिससे 5 लोगों को नया जीवन मिला।
रघु के अंगों को पीजीआई चंडीगढ़, एम्स दिल्ली, और आर्मी हॉस्पिटल दिल्ली में प्रत्यारोपित किया गया। रघु की दोनों किडनियां, लीवर, पैंक्रियाज और हार्ट को विभिन्न रोगियों में प्रत्यारोपित किया गया। इसके अलावा, रघु ने अपनी आंखें भी दान की, जिनका काॅर्निया एम्स के आई बैंक में सुरक्षित रखा गया है। अब ये काॅर्निया जल्द ही जरूरतमंदों की आंखों में प्रत्यारोपित किए जाएंगे।
एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि रघुवीर के अंगदान से विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 5 लोगों को नया जीवन मिला है। इस प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस ने ग्रीन कोरिडोर बनाने में मदद की, ताकि अंगों को तय समय में संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।
डॉ. भारत ने यह भी बताया कि रघुवीर के अंगों की समय पर ट्रांसपोर्टेशन के लिए एम्स से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, ऋषिकेश से दिल्ली और चंडीगढ़ के अस्पतालों तक ग्रीन कोरिडोर का रास्ता तैयार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एम्स के डॉक्टरों की टीम और अन्य विशेषज्ञों का योगदान अत्यधिक सराहनीय था।
इस सफलता की सराहना करते हुए, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा, “रघु भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका योगदान अमूल्य है। उनका अंगदान समाज के लिए एक उदाहरण है। हमें चाहिए कि हम समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाएं।”
एम्स ऋषिकेश में अंगदान का यह दूसरा मामला है। इससे पहले, 2 अगस्त 2024 को हरियाणा के एक कांवड़िये ने भी इसी संस्थान में अंगदान किया था।
रघु की कहानी एक प्रेरणा है कि कैसे एक व्यक्ति मरकर भी कई जीवन बचा सकता है। यह दिखाता है कि अंगदान महादान है और हमें इसे बढ़ावा देना चाहिए।



