देहरादून(अंकित तिवारी): उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग और क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून परिसर के संयुक्त तत्वाधान में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में नेताजी के योगदान और उनके विचारों पर विशेष चर्चा की गई, जिसे आज भी प्रासंगिक माना जाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिसर निदेशक डॉ. सुभाष रमोला ने नेताजी के अद्वितीय कार्यों के बारे में बताया और कहा कि उन्होंने भारतीय जनता में जन चेतना को जागरूक करने के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी हमारे दिलों में जीवित है। डॉ. रमोला ने नेताजी के विचारों को भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया और कहा कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए सहायक प्राध्यापिका डॉ. भावना डोभाल ने मंचासीन सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और बताया कि आज का दिन ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने नेताजी के नेतृत्व में हुए स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों को याद किया और कहा कि यह दिन हमारे देश की वीरता और बलिदान को सम्मानित करने का दिन है।
मुख्य वक्ता के रूप में विशेष शिक्षा विभाग के सभी प्राध्यापकों और पाठ्यक्रम से संबंधित डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने अपने उद्बोधन में कहा, “स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान अविस्मरणीय है। उनका संघर्ष केवल स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि वह समानता और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे।” उन्होंने नेताजी के प्रसिद्ध नारे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” को याद करते हुए कहा कि यह नारा आज भी हर भारतीय के दिलों में गूंजता है।
इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका भावना धोनी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता संग्राम में किए गए योगदानों को विस्तृत रूप से बताया। उन्होंने नेताजी की बहादुरी और उनकी महानता को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को भारतीय समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर बताया।
कार्यक्रम का संचालन विशेष शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका सुश्री निशा राणा ने किया। इस अवसर पर परिसर कार्यालय के बृजमोहन सिंह खाती, कुंदन सिंह, अजय कुमार, अरविंद कोटियाल, अभिषेक और विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
इससे पूर्व, परिसर कार्यालय में वसंत पंचमी के अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों, परिसर कार्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों द्वारा सरस्वती पूजन भी किया गया।
कार्यक्रम ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और उनके अद्वितीय योगदान को न केवल याद किया, बल्कि उनके विचारों और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाने का संदेश दिया।










