देहरादून(अंकित तिवारी)। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने रेंजर्स ग्राउंड,देहरादून में आयोजित देश के 30वें “दिव्य कला मेला” का उद्घाटन करते हुए कहा कि यहाँ प्रदर्शित प्रत्येक उत्पाद, कलाकृति और प्रस्तुति यह प्रमाणित करती है कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि संकल्प, आत्मबल और रचनात्मकता की पहचान है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस नौ दिवसीय मेले में देशभर से आए दिव्यांग कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों व नवाचारों का प्रदर्शन किया।
मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया, प्रतिभागियों से संवाद कर उनके उत्पादों की जानकारी ली और विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को रियायती ऋण के चेक भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन सहानुभूति के नहीं, सम्मान, अवसर और समान भागीदारी के अधिकारी हैं। राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और जब उन्हें उचित मंच व संसाधन मिलते हैं तो वे समाज और देश को नई दिशा देने में सक्षम होते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक, एआई और टेक्नोलॉजी दिव्यांगजनों के लिए नए अवसर खोल रही हैं, जिनसे वे सृजन, नवाचार और उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं। यह मेला “लोकल फॉर वोकल” के मंत्र को साकार करता है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सुदृढ़ करता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि दिव्य कला मेला मानवीय सामर्थ्य, आत्मनिर्भरता और सम्मान का उत्सव है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुगम्य भारत अभियान, दिव्यांग पेंशन योजना, विशेष शिक्षा संस्थान और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांग सशक्तीकरण की दिशा में ठोस कार्य हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि चालू बजट में एलिम्को के माध्यम से सहायक उपकरणों की खरीद व फिटिंग के लिए ₹375 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कहा कि दिव्य कला मेला जैसे आयोजन सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक माध्यम हैं। उन्होंने पैरालंपिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। वहीं विधायक खजान दास ने इसे दिव्यांगजनों के सम्मान और अवसर का सशक्त उदाहरण बताया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक प्रदीप ए. ने स्वागत संबोधन में कहा कि यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को बाजार, वित्त और रोजगार से जोड़ने का समग्र प्रयास है। मेले में सहायक उपकरणों हेतु पंजीकरण, विभिन्न संस्थाओं की जानकारी और रोजगार मेलों के माध्यम से सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
आंकड़े जो सशक्तिकरण की कहानी कहते हैं
अब तक देश के 29 स्थानों पर आयोजित दिव्य कला मेलों में 2362 प्रतिभागियों ने भाग लिया और ₹23 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। दिव्यांग उद्यमियों के लिए ₹20 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। रोजगार मेलों में 3131 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 1007 शॉर्टलिस्ट हुए और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव प्राप्त हुए।
देहरादून में आयोजित इस नौ दिवसीय मेले में लगभग 90 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें 16 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी भाग ले रहे हैं। हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने और उपहार सामग्री सहित विविध उत्पाद उपलब्ध हैं।

26 फरवरी 2026 को विशेष रोजगार मेला तथा 1 मार्च 2026 को “दिव्य कला शक्ति” नामक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा।
21 फरवरी से 1 मार्च तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक चलने वाले इस मेले में प्रवेश निःशुल्क है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, खेल गतिविधियाँ और सहायक उपकरण पंजीकरण सुविधाएँ इसे एक समावेशी, प्रेरक और सशक्त मंच बनाती हैं—जहाँ कला के माध्यम से आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई कहानी लिखी जा रही है।
कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के सचिव श्रीधर बाबू, आयुक्त दिव्यांगजन सशक्तिकरण प्रकाश चंद्र, आयुक्त एस. गोविंद राज तथा एनडीएफडीसी के सीएमडी अनिल कुमार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन भारती आनंद ने किया।
दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का अद्भुत उत्सव है—जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करता है, जहाँ हर प्रतिभा को मंच, हर हाथ को काम और हर सपने को उड़ान मिलती है।













