कर्णप्रयाग/चमोली(अंकित तिवारी) :
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में आपदा प्रबंधन को लेकर तीन दिवसीय कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें भूकंप, आग एवं वनाग्नि जैसी आपदाओं पर मॉक एक्सरसाइज कर प्रतिभागियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उप-जिलाधिकारी कर्णप्रयाग, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आर.ए. सिंह एवं डॉ. मंजू पांडेय सहित अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
उप-जिलाधिकारी कर्णप्रयाग ने अपने संबोधन में कहा कि चमोली जनपद भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां भूकंप, भूस्खलन एवं वनाग्नि जैसी आपदाओं की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आपदा के प्रति जागरूकता और पूर्व तैयारी ही जन-धन की हानि को कम कर सकती है।
डॉ. मंजू पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड देश के सर्वाधिक आपदाग्रस्त क्षेत्रों में शामिल है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के जोन-5 जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र राज्य में स्थित हैं, जिससे यहां आपदा प्रबंधन की विशेष आवश्यकता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आर.ए. सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी निर्माण कार्य से पहले भूमि की संवेदनशीलता का वैज्ञानिक परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उत्तराखंड में पूर्व में आई आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि समय रहते वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाता, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
कार्यशाला में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अखिलेश कुकरेती, डॉ. एम.एस. कण्डारी, डॉ. आर.सी. भट्ट, डॉ. बी.सी.एस. नेगी, डॉ. राधा रावत, डॉ. कविता पाठक, डॉ. हरीश बहुगुणा, डॉ. इन्द्रेश कुमार पाण्डेय, डॉ. एच.सी. रतूड़ी, डॉ. नेतराम, डॉ. दीप सिंह, डॉ. तरुण आर्य, डॉ. कमल किशोर द्विवेदी, डॉ. चन्द्रमोहन जंस्वाण, डॉ. पूनम, डॉ. वी.आर. अंथवाल, डॉ. कमलेश चन्द्र लोहनी, डॉ. शालिनी सैनी, डॉ. दिशा शर्मा, डॉ. सीमा पोखरियाल सहित अन्य प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यशाला के आगामी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्यों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ मॉक ड्रिल आयोजित की जाएंगी, जिससे प्रतिभागियों को आपात स्थिति में प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सके।





