कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी): डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला के अंतर्गत तेरहवें व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का विषय “सतत विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका” रहा, जिसने छात्रों और शिक्षकों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और अधिक समृद्ध किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में ऐसे ज्ञानवर्धक व्याख्यानों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ शोध की दिशा में नई संभावनाएं खोलते हैं।
इस अवसर पर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. विद्याधर पांडेय ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने सूक्ष्मजीवों की विशेषताओं, उनके विविध स्वरूपों तथा अन्य जीवों के साथ उनके पारस्परिक संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. पांडेय ने विशेष रूप से नील-हरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि ऊर्जा संकट के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इनके विभिन्न औद्योगिक और कृषि संबंधी अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की और बताया कि इनका उपयोग राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूक्ष्मजीव सतत विकास के मूल आधार हैं, जो पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ जैव विविधता को संरक्षित करने में अहम योगदान देते हैं।
व्याख्यान के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों के अनेक शिक्षक एवं छात्र भी जुड़े, जिससे यह आयोजन और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बन गया।




