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एम्स ऋषिकेश में हिंदी कार्यशाला , भाषा विकास को मिला नया आयाम

ऋषिकेश(अंकित तिवारी)। राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग और उसके उत्तरोत्तर विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला एवं हिंदी क्विज प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हिंदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

कार्यशाला का आयोजन राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में किया गया, जिसमें राजकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह, प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी  मुकेश पाल, अतिथि वक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार जगूड़ी तथा  वीरेंद्र सिंह राणा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार जगूड़ी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का सशक्त माध्यम है।” उन्होंने कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने और उससे जुड़ी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान भी साझा किए। वहीं, वीरेंद्र सिंह राणा ने हिंदी की स्वीकार्यता को बढ़ाने पर जोर देते हुए इसे जन-जन की भाषा बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्थान के उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए, उसे दैनिक व्यवहार और कार्यालयी कार्यों का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि *निरंतर प्रयोग से ही भाषा का वास्तविक विकास संभव है।

कार्यक्रम के सफल संचालन में हिंदी सेल के वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी शशि यादव, कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी नीरज कुमार वर्मा, सुश्री स्वाति कैंतुरा तथा कार्यालय परिचारक मंजीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यशाला के अंत में आयोजित हिंदी क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। यह आयोजन न केवल हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि संस्थान के कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायक भी रहा।

एम्स ऋषिकेश का यह प्रयास हिंदी को प्रशासनिक और व्यावहारिक जीवन में सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है, जो अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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