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कर्णप्रयाग महाविद्यालय में आपदा प्रबंधन कार्यशाला का समापन

एसडीआरएफ ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन  सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह कार्यशाला डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल द्वारा “मॉक एक्सरसाइज ऑन अर्थक्वेक, फायर एंड फॉरेस्ट फायर” विषय पर आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय को आपदा से निपटने के लिए जागरूक एवं प्रशिक्षित करना था।

समापन सत्र में एसडीआरएफ (SDRF) टीम ने प्रतिभागियों को आपदा एवं दुर्घटना के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) देने के व्यावहारिक तरीके सिखाए। टीम ने विशेष रूप से रक्तस्राव, फ्रैक्चर, चोट लगने जैसी आपात स्थितियों में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि आपदा के समय सही और समय पर दी गई प्राथमिक चिकित्सा कई बहुमूल्य जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम में उपस्थित एसडीओ बद्रीनाथ, विकास दरमोड़ा ने आपदा प्रबंधन में बचाव कार्यों की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुनियोजित और त्वरित बचाव कार्यों के माध्यम से आपदा से होने वाली क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण का उपयोग समाज में जागरूकता फैलाने के लिए करें।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आर.ए. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यशाला न केवल जागरूकता बढ़ाने में सफल रही, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आपदा के समय सक्षम नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया है। उन्होंने आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर बल दिया।

कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. मंजू पांडेय ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में जनभागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से युवा वर्ग में आपदा के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

कार्यशाला में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर पूरे परिसर में जागरूकता और सीखने का सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जो भविष्य में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक सशक्त पहल के रूप में उभरेगा।

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