कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एडुसेट सभागार में गुरुवार को प्रख्यात शिक्षाविद, साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. शिवानंद नौटियाल की पुण्यतिथि पर एक गरिमामय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डा.) राम अवतार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. नौटियाल एक महान विभूति थे, जिनका शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान रहा है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
नंदा देवी राजजात समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने उनके राजनीतिक और शैक्षिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कर्णप्रयाग के विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल की।
प्राध्यापक डॉ. वी.आर. अंथवाल ने कहा कि डॉ. नौटियाल केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के संवाहक भी थे। उन्होंने ‘गढ़वाल का इतिहास’ और ‘गढ़वाल की लोक संस्कृति’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियों के माध्यम से क्षेत्रीय विरासत के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एम.एस. कंडारी, डॉ. आर.सी. भट्ट सहित अन्य शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। पूरे कार्यक्रम में डॉ. शिवानंद नौटियाल के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।




