देहरादून(अंकित तिवारी)। श्रीमद्भागवत कथा जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। इसके श्रवण से मन की शुद्धि होती है, अज्ञान और भय का नाश होता है तथा मनुष्य धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष की प्राप्ति की थी। यह कथा हमें संसार से पलायन नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी धर्म और श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देती है।
यह विचार राष्ट्रीय संत एवं सुप्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने व्यासपीठ से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली आध्यात्मिक साधना है।
उल्लेखनीय है कि बद्रीपुर जोगीवाला स्थित नाइन पाम्स रिसोर्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन शकुंतला नौटियाल द्वारा अपने स्वर्गीय पति जगदम्बा प्रसाद नौटियाल की पुण्य स्मृति में तथा स्वर्गीय भगवती प्रसाद नौटियाल की पत्नी उषा नौटियाल द्वारा उनके वार्षिक श्राद्ध एवं समस्त पितरों की स्मृति में कराया जा रहा है। 13 जून से प्रारंभ हुई यह कथा 19 जून तक चलेगी। समापन अवसर पर पूर्णाहुति एवं विशाल भागवत भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
कथा के दूसरे दिन रविवार को कथा मंडप में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। भजन संध्या के दौरान सुमधुर भजनों की स्वर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर मंडपाचार्य रमेश चंद्र पैन्यूली, पूर्व राज्य मंत्री रोशन लाल सेमवाल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद रतूड़ी, अनुभाग अधिकारी खिलाफ सिंह बिष्ट, डॉ. मानवीरेंद्र कंडारी, डॉ. हरीश रतूड़ी, पूर्व उप महाधिवक्ता हर्ष मणि रतूड़ी, पंकज नौटियाल, मयंक नौटियाल, प्रमोद रतूड़ी, नवीन रतूड़ी, हरीश पैन्यूली, डॉ. राकेश नौटियाल, गिरीश पैन्यूली, राजेन्द्र बहुगुणा, नीलम तलवाड़, राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा, प्रीति सकलानी, उर्मिला बहुगुणा, दीक्षा उनियाल, शेखर सकलानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




