डोईवाला(अंकित तिवारी)। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। ऐसे में आर्थिक अभाव के कारण यदि किसी प्रतिभाशाली और पढ़ाई में रुचि रखने वाले विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित होती है, तो समाज की जिम्मेदारी है कि वह उसके सपनों को संबल प्रदान करे। इसी सोच को साकार करने की दिशा में साईं सृजन पटल ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी पहल करते हुए बुक बैंक की स्थापना की है। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद एवं मेधावी विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई से संबंधित पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराकर उनके शैक्षणिक सफर को आसान बनाना है।
पटल के संस्थापक एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. के.एल. तलवाड़ ने बताया कि देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त के पावन अवसर पर बुक बैंक की विधिवत शुरुआत की गई। ‘पुस्तक भेंट–सर्वश्रेष्ठ’ के ध्येय वाक्य के साथ प्रारंभ किया गया यह अभियान शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक सहभागिता और सहयोग की एक नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। इस अभियान के माध्यम से शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और समाज के जागरूक नागरिकों को पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों की मदद के लिए आगे आने का अवसर मिलेगा।
बुक बैंक की स्थापना के साथ ही अनेक शिक्षाविदों ने इस पुनीत अभियान में अपना योगदान देकर इसकी शुरुआत को और अधिक सार्थक बनाया है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरीश चंद्र रतूड़ी ने वाणिज्य विषय की पांच पुस्तकें, जबकि सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. राजेश कुमार उभान ने 61 पुस्तकें बुक बैंक को भेंट कीं। वहीं, पटल के संस्थापक प्रो. के.एल. तलवाड़ ने अर्थशास्त्र विषय की 21 पुस्तकें प्रदान कर इस अभियान को गति दी। यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज के अनुभवी और शिक्षित वर्ग एक सकारात्मक उद्देश्य के लिए आगे आएं तो संसाधनों के अभाव में भी अनेक विद्यार्थियों के सपनों को पंख दिए जा सकते हैं।
इस बुक बैंक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पुस्तकों का वितरण केवल सामान्य रूप से नहीं किया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत जरूरतमंद और पढ़ाई में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को उनके महाविद्यालय अथवा घर तक पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकें उनके विषय और पाठ्यक्रम के अनुरूप हों, ताकि वे सीधे तौर पर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में उपयोगी सिद्ध हो सकें।
साईं सृजन पटल पहले से ही शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना चुका है। पटल द्वारा अब तक मेधावी छात्रवृत्ति तथा एनएसएस सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवी पुरस्कार प्रदान किए जाते रहे हैं। ऐसे में बुक बैंक की स्थापना पटल के शैक्षणिक और सामाजिक दायित्वों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय है। यह पहल केवल पुस्तकें बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास जगाने और उन्हें यह विश्वास दिलाने का प्रयास है कि आर्थिक सीमाएं उनके ज्ञान और सपनों के मार्ग में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं।
पटल की इस नवीन पहल का उच्च शिक्षा जगत में भी व्यापक स्वागत हुआ है। उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. आनंद सिंह उनियाल, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. हर्षवंती बिष्ट तथा प्रो. एम.सी. नैनवाल सहित सेवानिवृत्त प्राचार्यों के संगठन ने बुक बैंक की स्थापना की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए पटल को शुभकामनाएं दी हैं। शिक्षाविदों का यह समर्थन इस अभियान के महत्व और इसकी सामाजिक उपयोगिता को रेखांकित करता है।
बुक बैंक को आगे और समृद्ध बनाने के लिए भी शिक्षाविदों ने सहयोग का भरोसा दिलाया है। संयुक्त निदेशक प्रो. आनंद सिंह उनियाल, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार तथा असिस्टेंट प्रोफेसर, वानस्पति विज्ञान डॉ. इन्द्रेश कुमार पांडेय ने भी बुक बैंक के लिए पुस्तकें भेंट करने की बात कही है। यदि इसी प्रकार समाज के विभिन्न वर्गों से सहयोग मिलता रहा तो यह बुक बैंक आने वाले समय में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
पटल के सहयोगी अंकित तिवारी ने कहा कि बुक बैंक की स्थापना से जरूरतमंद और मेधावी विद्यार्थी निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के दौरान विषयानुसार पुस्तकों की उपलब्धता कई विद्यार्थियों के लिए चुनौती होती है और ऐसे में यह पहल उनके लिए एक मजबूत सहारा बनेगी। यह अभियान समाज के उन सभी लोगों को भी प्रेरित करेगा जिनके पास उपयोगी शैक्षणिक पुस्तकें हैं और जो उन्हें किसी जरूरतमंद विद्यार्थी तक पहुंचाकर शिक्षा के प्रसार में अपना योगदान देना चाहते हैं।
अभियान की शुरुआत में ही इसका लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचने लगा है। केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर में बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्रा शाम्भवी लोहनी के लिए उनकी माता अर्चना लोहनी को अंग्रेजी माध्यम की पांच पुस्तकें भेंट की गईं। यह उदाहरण बुक बैंक की अवधारणा को जीवंत करता है और बताता है कि पुस्तकें जब जरूरतमंद हाथों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल पन्नों का संग्रह नहीं रहतीं, बल्कि किसी विद्यार्थी के भविष्य को संवारने का माध्यम बन जाती हैं।
आज जब शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की असमानता अनेक विद्यार्थियों के सामने चुनौती बनी हुई है, तब साईं सृजन पटल का बुक बैंक अभियान सामाजिक संवेदनशीलता, शैक्षणिक सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि घरों और पुस्तकालयों में सुरक्षित पड़ी उपयोगी पुस्तकें किसी जरूरतमंद विद्यार्थी के लिए सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं।
‘पुस्तक भेंट–सर्वश्रेष्ठ’ का यह संदेश जितना सरल है, उतना ही व्यापक और प्रभावशाली भी। एक पुस्तक का दान किसी विद्यार्थी को ज्ञान दे सकता है, ज्ञान उसके भीतर आत्मविश्वास जगा सकता है और वही आत्मविश्वास उसके भविष्य की दिशा बदल सकता है। निस्संदेह, साईं सृजन पटल की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में सेवा और सहयोग की एक प्रेरक मिसाल बनेगी तथा आने वाले समय में अनेक जरूरतमंद विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




