साहिया(अंकित तिवारी)। सरदार महिपाल राजेन्द्र (एसएमआर) जनजातीय पीजी कॉलेज, साहिया में आयोजित शैक्षणिक परिषद की 9वीं बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए शोध, नवाचार और गुणवत्ता आधारित शिक्षा को केंद्र में रखकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। परिषद ने तय किया कि स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को शोध-पत्र लेखन के लिए प्रेरित किया जाएगा तथा उन्हें उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सर्वेक्षणों से जोड़ा जाएगा, जिससे उनमें शोध दृष्टि, लेखन क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास हो सके।
दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता संस्थाध्यक्ष अनिल सिंह तोमर ने की। बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र की गतिविधियों, नवाचार, गुणवत्ता संवर्धन तथा विभिन्न विभागों की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी विभागाध्यक्षों एवं सह-शैक्षणिक विभागों के प्रभारियों ने अपने-अपने विभागों का वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर प्रस्तुत किया।
बैठक में कुल आठ प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्राचार्य डॉ. रवि कुमार ने शैक्षणिक गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. प्रियंका जलाल ने प्रशासन, आधारभूत संरचना एवं दूरस्थ शिक्षा, डॉ. चंद्रिका ने मूल्यांकन, अनुशासन एवं गुणवत्ता तथा डॉ. रीना रांगढ़ ने सांस्कृतिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
इसके अलावा सुश्री रेखा ने सूचना, संचार एवं प्रशासन, श्री रिंकूदास भारती ने सामाजिक एवं जनसंपर्क, श्री प्रदीप कुमार ने पुस्तकालय एवं वाचनालय, श्री वरुण प्रसाद सेमवाल ने क्रीड़ा, श्री पपेश राणा ने कैरियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट, श्री नितिन तोमर ने वित्त एवं लेखा, श्री रितेश चौहान ने परीक्षा तथा श्री मुकेश तोमर ने प्रवेश एवं शैक्षणिक नीति विभाग की वार्षिक योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया।
बैठक में प्रशासनिक अधिकारी सुनील शर्मा सहित सुमन तोमर, भारत सिंह, गंभीर सिंह चौहान, गंभीर तोमर, साहिल राय, रीता तोमर, काजल एवं नरेश चौहान आमंत्रित सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।
“गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध हमारी प्राथमिकता” : अनिल सिंह तोमर
बैठक के समापन पर संस्थाध्यक्ष अनिल सिंह तोमर ने कहा कि महाविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है। उन्होंने सभी विभागों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।







