कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में शनिवार को नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के मार्गदर्शन के लिए ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्ययन केंद्र संख्या 17030, कर्णप्रयाग में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा पद्धति, परामर्श सत्रों और सत्रीय कार्यों की जानकारी प्रदान करना तथा उन्हें दूरस्थ शिक्षा की व्यवस्था से परिचित कराना था।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ सुबह 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रमेश चंद्र भट्ट ने स्वागत भाषण देते हुए सभी नवप्रवेशित शिक्षार्थियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि ‘दीक्षारंभ’ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराना और उन्हें अध्ययन की नई व्यवस्था में सहज रूप से समायोजित होने में सहायता प्रदान करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को समझते हुए अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
सर्वांगीण विकास और कौशल संवर्धन पर जोर
सहायक क्षेत्रीय निदेशक श्रीमती प्रियंका लोहनी पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षार्थियों का सर्वांगीण विकास करना, उनके कौशल को विकसित करना और उन्हें समाज के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार अध्ययन करने का अवसर प्रदान करती है। विद्यार्थियों को इस अवसर का सदुपयोग करते हुए सकारात्मक सोच के साथ अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों की दी जानकारी
अध्ययन केंद्र की सहायक समन्वयक डॉ. कविता पाठक ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये बदलाव विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
उन्होंने विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए परामर्श सत्रों की उपयोगिता और उनकी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही विद्यार्थियों को समय पर प्रवेश संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने, नियमित रूप से स्व-अध्ययन करने तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्रीय कार्य जमा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने परीक्षा और असाइनमेंट के महत्व को समझाते हुए कहा कि शैक्षणिक सफलता के लिए समय प्रबंधन, निरंतर अध्ययन और विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।
तकनीकी सत्र में प्रवेश से लेकर परीक्षा तक की प्रक्रिया समझाई
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी दी गई। क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रमेश चंद्र भट्ट ने प्रवेश प्रक्रिया, परामर्श सत्रों की व्यवस्था, सत्रीय कार्य जमा करने के नियमों और परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं के प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
सहायक क्षेत्रीय निदेशक श्रीमती प्रियंका लोहनी पाण्डेय ने भी अध्ययन केंद्रों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा कीं। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को स्व-अध्ययन की आदत विकसित करने तथा उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
बड़ी संख्या में शिक्षार्थियों ने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नवप्रवेशित शिक्षार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर महाविद्यालय से डॉ. नेहा तिवारी पाण्डेय, नरेंद्र पंघाल, एस.एल. मुनियाल, अंशुमन चौहान, जगदीश रावत, मुकेश कंडारी, संजय नेगी, उमेश पुरोहित, ममता भंडारी, छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील रावत, रामकृष्ण पुरोहित, संजीव कुमार, गिरीश चंद्र, अनूप, बद्रीश और विशाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
शिक्षार्थियों ने कार्यक्रम को अपने शैक्षणिक भविष्य के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें विश्वविद्यालय की अध्ययन व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सत्रीय कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रमेश चंद्र भट्ट ने सभी शिक्षार्थियों एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।











