शिक्षा

सुभारती विश्वविद्यालय ने एनएसएस इकाई के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दिया

रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में एनएसएस इकाई का उद्घाटन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की पहल

देहरादून(अंकित तिवारी): रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून ने अपने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में कोटदा संतौर गांव में एक स्वच्छता जागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसका उद्देश्य निवासियों के बीच स्वच्छता, स्वास्थ्य और जागरूकता को बढ़ावा देना था।
इस समारोह में राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. सुनैना रावत, कुलपति डॉ. राजेश मिश्रा, प्रति उपकुलपति डॉ. हिमांशु अरेन, उप निदेशक प्रजापति नौटियाल, संयुक्त निदेशक डॉ. देबब्रत रॉय, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी प्रदीप महरा, सह-कार्यक्रम अधिकारी वंदना डंगवाल एवं अन्य संकाय सदस्य और एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।


मुख्य अतिथि, राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. सुनैना रावत ने युवाओं की सामाजिक सेवा में भागीदारी और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में एनएसएस की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को सामुदायिक विकास में अपनी नेतृत्व क्षमता को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कुलपति, डॉ. राजेश मिश्रा ने विश्वविद्यालय की व्यापक दृष्टि और छात्रों के भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका के बारे में बात की। प्रति उपकुलपति, डॉ. हिमांशु ऐरन ने स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता की सराहना की और उन्हें विभिन्न सामुदायिक केंद्रित पहलों में सक्रिय भागीदारी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने वर्ष की योजनाओं और छात्रों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए आगामी गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
उप निदेशक, प्रजापति नौटियाल ने शैक्षिक यात्रा के हिस्से के रूप में सामुदायिक सेवा के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों से स्थानीय समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने और वास्तविक बदलाव लाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिसर में एक पौधारोपण अभियान भी शामिल था, जहां गणमान्य व्यक्तियों ने एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पौधे लगाए। एनएसएस इकाई की स्वच्छ और हरित पर्यावरण बनाने की प्रतिबद्धता स्पष्ट थी क्योंकि छात्रों और संकाय ने इस पहल को सफल बनाने में योगदान दिया।
पौधारोपण अभियान के बाद कोटदा संतौर गांव में स्वच्छता जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।इस पहल ने न केवल छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दिया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाया।

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