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कर्णप्रयाग महाविद्यालय में जैविक कृषि पर व्याख्यान

कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी): डा शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला का नवां व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसका विषय था ‘जैविक कृषि: मानव स्वास्थ्य के लिए एक स्थायी माॅडल’। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. कविता पाठक के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ।

इस व्याख्यान को मध्य प्रदेश के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पन्ना के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. मनोज शुक्ला ने प्रस्तुत किया। उन्होंने जैविक कृषि के महत्व और इसके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. शुक्ला ने भारत में हरित क्रांति के बाद हुई कृषि बदलावों पर भी प्रकाश डाला और यह बताया कि कैसे जैविक खेती की ओर बढ़ने से न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी यह एक स्थायी समाधान साबित हो सकता है।

अपने व्याख्यान में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर भी चर्चा की और जैविक कृषि के माध्यम से इन समस्याओं को कैसे सुलझाया जा सकता है, इस पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। साथ ही, उन्होंने जैविक कृषि को अपनाने के विभिन्न लाभों की व्याख्या की, जैसे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन पर प्रभावी नियंत्रण, और पर्यावरण को सुरक्षित रखना।

व्याख्यान के दौरान, छात्रों और शिक्षकों ने उत्साह से प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. शुक्ला ने संतोषजनक उत्तर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार पाण्डेय ने किया, और इस कार्यक्रम में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के प्राध्यापक-शिक्षकों के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों के भी प्राध्यापक और छात्र ऑनलाइन जुड़े।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. मदन लाल शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और इस उत्कृष्ट व्याख्यान को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

यह व्याख्यान महाविद्यालय में जैविक कृषि के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम साबित हुआ और छात्रों को एक नई दिशा में सोचने का अवसर प्रदान किया।

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