Breakingउत्तराखंडदेश-विदेशमनोरंजनयूथराजनीतिरोजगारशिक्षासामाजिक

हिमालयी जैव-विविधता के संरक्षण में पादप ऊत्तक संवर्धन की भूमिका अहम : डॉ. पूजा झा

कर्णप्रयाग महाविद्यालय में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला का बारहवां व्याख्यान आयोजित

कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला के अंतर्गत बारहवें व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूजा झा ने “हिमालयी जैव-विविधता के सतत उपयोग में पादप ऊत्तक संवर्धन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह के प्रेरक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में इस प्रकार की व्याख्यानमालाओं को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को नवीन वैज्ञानिक शोध एवं समकालीन विषयों की जानकारी प्राप्त होती है, जो उनके शैक्षणिक विकास में सहायक सिद्ध होती है।

अपने व्याख्यान में डॉ. पूजा झा ने पादप ऊत्तक संवर्धन के मौलिक सिद्धांतों, उसकी वैज्ञानिक प्रक्रिया तथा इसके विभिन्न अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, किंतु बदलती जलवायु, अनियंत्रित दोहन तथा अन्य पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण कई महत्वपूर्ण वनस्पतियाँ संकट में हैं। ऐसे में पादप ऊत्तक संवर्धन तकनीक के माध्यम से दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण और संवर्धन प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

उन्होंने हिमालयी पादपों और जैव-विविधता के सतत उपयोग के संदर्भ में ऊत्तक संवर्धन तकनीक के महत्व का विश्लेषण करते हुए बताया कि यह तकनीक न केवल जैव-विविधता के संरक्षण में सहायक है, बल्कि इसके माध्यम से औषधीय एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का बड़े पैमाने पर संवर्धन संभव है। इससे राज्य की आर्थिकी को भी सुदृढ़ किया जा सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

डॉ. झा ने यह भी बताया कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी तकनीकों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र की बहुमूल्य वनस्पतियों को संरक्षित रखते हुए उनका वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में अनुसंधान की संभावनाओं से भी अवगत कराया और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

व्याख्यान के अंत में विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए डॉ. झा ने विषय से संबंधित अनेक जिज्ञासाओं का समाधान किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों के अनेक प्राध्यापक एवं छात्र भी जुड़े और व्याख्यान का लाभ प्राप्त किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button