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विश्व गुर्दा दिवस पर एम्स ऋषिकेश में जागरूकता कार्यक्रम

बिना डॉक्टर की सलाह दवा न छोड़ें किडनी रोगी

ऋषिकेश(अंकित तिवारी) : विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर एम्स ऋषिकेश में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मरीजों, तीमारदारों और आम नागरिकों को गुर्दा संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने किडनी रोगों के लक्षण, बचाव, उपचार और अंगदान के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. दीपेश धूत ने बताया कि अधिकतर मामलों में किडनी रोग अनियंत्रित रक्तचाप और मधुमेह के कारण विकसित होते हैं। उन्होंने क्रोनिक किडनी रोगियों को सलाह दी कि वे अपनी दिनचर्या के अनुसार संतुलित खान-पान रखें और शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ने न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिएटिनिन बढ़ने की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद करना खतरनाक हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेताया कि किडनी रोगियों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

डाॅ. धूत ने डायलिसिस करा रहे मरीजों को खानपान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि भोजन में नमक की मात्रा कम रखें, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सेवन करें और केला, संतरा, आलू तथा नारियल पानी जैसे पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

कार्यक्रम में विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. शेरोन कंडारी ने गुर्दा प्रत्यारोपण और अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से जरूरतमंदों की सहायता के लिए किडनी दान करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण से संबंधित कई भ्रांतियां समाज में फैली हुई हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, इसकी आवश्यकता, प्रत्यारोपण के बाद रोगी की देखभाल और संभावित जटिलताओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी तथा पहले वर्ष में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।

कार्यक्रम का संचालन नेफ्रोलॉजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर डाॅ. संदीप कौर ने किया। इस दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. साहित गर्ग सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी किडनी रोगों के लक्षण, डायलिसिस प्रक्रिया और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जनरल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रविकांत, नेफ्रोलॉजी विभाग के एसआर, जेआर, नर्सिंग अधिकारी तथा बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार उपस्थित रहे।

इस अवसर पर किडनी रोग से उबर चुके कई मरीजों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर उपचार और सावधानी से वे अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

एम्स में 22 सफल गुर्दा प्रत्यारोपण
डाॅ. शेरोन कंडारी ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में अब तक 22 गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेन डेथ घोषित एक व्यक्ति के अंगदान से आठ जरूरतमंद लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। देश में हर वर्ष लगभग दो लाख लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। उन्होंने अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि यह मानवता का सर्वोच्च दान है और सभी धर्मों में इसे स्वीकार किया गया है।

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