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बीबीएयू लखनऊ के छात्रों ने वाडिया और एफआरआई में किया भूविज्ञान का जीवंत अनुभव

देहरादून(अंकित तिवारी): बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय , लखनऊ के स्नातक चतुर्थ सेमेस्टर, भूविज्ञान विभाग के छात्रों ने  देहरादून स्थित प्रतिष्ठित संस्थानों—वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी एवं फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट का शैक्षणिक एवं भूवैज्ञानिक अध्ययन भ्रमण किया। यह भ्रमण छात्रों के लिए ज्ञानवर्धन के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।

वाडिया में वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं का गहन अध्ययन

छात्रों ने वाडिया में स्थित रॉक संग्रहालय, भूकंप विज्ञान प्रयोगशाला, आइसोटोप प्रयोगशाला तथा भू-रसायन प्रयोगशाला का विस्तारपूर्वक अध्ययन किया। विशेष रूप से भू-रसायन प्रयोगशाला ने छात्रों की जिज्ञासा को अत्यधिक आकर्षित किया।

संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद रजक ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। वहीं संस्थान के निदेशक डॉ. वी. के. गहलौत ने छात्रों को भूविज्ञान के विभिन्न आयामों से अवगत कराया और भविष्य में अनुसंधान हेतु प्रेरित किया।

भ्रमण के दौरान डॉ. सौरभ बर्मन ने संस्थान के निदेशक एवं सभी वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

एफआरआई में वन एवं पर्यावरणीय शोध की जानकारी

इसके पश्चात छात्रों ने फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) के विशाल परिसर एवं विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। यहां डॉ. अभिषेक वर्मा ने संस्थान के इतिहास, शोध कार्यों एवं प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

इस दौरान छात्रों ने वन विज्ञान और पर्यावरणीय अनुसंधान के विविध पहलुओं को नजदीक से समझा। भ्रमण के अंत में डॉ. सौरभ बर्मन ने FRI के निदेशक एवं समस्त वैज्ञानिकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिमालयी भूविज्ञान की विशेषताओं पर विशेष व्याख्यान

भ्रमण के दौरान डॉ. सौरभ बर्मन ने छात्रों को मोहंद घाटी एवं देहरादून क्षेत्र की भूवैज्ञानिक विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र शिवालिक समूह की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें निचली, मध्य एवं ऊपरी संरचनाएं सम्मिलित हैं।

उन्होंने मुख्य ललाट थ्रस्ट (MFT), जिसे स्थानीय रूप से मोहंद थ्रस्ट कहा जाता है, की भूमिका को समझाते हुए बताया कि यह क्षेत्रीय भू-आकृति निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही उन्होंने दून घाटी के जलोढ़ निक्षेप, मोहंद एंटीकलाइन तथा मोहन राव नदी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये सभी संरचनाएं हिमालयी भूविज्ञान को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

छात्रों के लिए प्रेरणादायक अनुभव

इस शैक्षणिक भ्रमण ने छात्रों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में समझने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें शोध के प्रति प्रेरित भी किया।

अंत में छात्रों ने इस सफल एवं ज्ञानवर्धक आयोजन के लिए विभागाध्यक्ष प्रो. नरेन्द्र कुमार एवं भूविज्ञान विभाग के समस्त शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए भूविज्ञान के क्षेत्र में एक नई दृष्टि और प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरा, जिसने उनके शैक्षणिक सफर को और अधिक सशक्त बनाया।

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