कर्णप्रयाग (अंकित)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में बुधवार को आयोजित गरिमामयी समारोह में साईं सृजन पटल मासिक पत्रिका की ओर से महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रमेश चंद्र भट्ट एवं डॉ. हरीश बहुगुणा को प्रतिष्ठित ‘लेखक श्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने दोनों विद्वानों को सम्मानित करते हुए उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान की सराहना की।
प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने कहा कि अध्ययन, अध्यापन और लेखन जैसे सृजनात्मक कार्य किसी भी शिक्षक के व्यक्तित्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने दोनों सम्मानित प्राध्यापकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. कीर्तिराम डंगवाल ने बताया कि भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्र भट्ट साईं सृजन पटल के विभिन्न अंकों के लिए अब तक 17 मौलिक एवं शोधपरक लेख लिख चुके हैं। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था, लोकपरंपराओं और प्राकृतिक धरोहरों पर उनका लेखन विशेष रूप से चर्चित रहा है। उनके लेख फ्योंली, फूलदेई, मांगल गीत, संस्कृत गांव, इगास बग्वाल, चौसिंग्या खाडू, ओंकारेश्वर, टिम्मरसैंण महादेव, त्रियुगीनारायण, मां मठियाणा देवी, उमरानारायण मंदिर, जाख देवता, जनजातीय आभूषण एवं वेशभूषा, कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना, कमेड़ा भूस्खलन क्षेत्र तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहे हैं, जिन्हें पत्रिका के विभिन्न अंकों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
वहीं, संस्कृत विभाग के डॉ. हरीश बहुगुणा के पर्यावरण संरक्षण एवं चित्रकला विषयक लेखों को भी पाठकों ने व्यापक सराहना दी है। इस अवसर पर डॉ. इंद्रेश कुमार पांडेय को भी पत्रिका की लेखक प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया।
महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं साईं सृजन पटल के मुख्य संपादक प्रो. (डॉ.) के.एल. तलवाड़ ने अपने संदेश में कहा कि साईं सृजन पटल की स्थापना और निरंतर प्रगति में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के अधिकांश प्राध्यापक पूर्व में भी देहरादून स्थित साईं सृजन पटल कार्यालय में ‘लेखक श्री सम्मान’ से सम्मानित हो चुके हैं।
समारोह में प्रो. गिरीश डंगवाल, डॉ. किरन पंत, डॉ. सृष्टि बल्लभ मिश्रा, डॉ. कामना लोहनी, डॉ. नंद लाल, डॉ. त्रिभुवन खाली सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक उपस्थित रहे।





