उत्तरकाशी(अंकित तिवारी)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाजसेवी स्व. नत्था सिंह कश्यप की पुण्यतिथि पर परिजनों एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके संघर्ष, सादगी और समाजसेवा को स्मरण किया। स्व. कश्यप का जन्म 3 मई 1921 को ग्राम रोणिंया, पट्टी भदुरा, तहसील प्रतापनगर, जनपद टिहरी में हुआ था। उनका निधन 24 सितंबर 2015 को प्रातः 5:55 बजे ग्राम नागणी, चिन्यालीसौड़ स्थित उनके निवास पर हुआ।
स्व. नत्था सिंह कश्यप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव रोणिंया में प्राप्त की। उस समय पूरी पट्टी में केवल एक ही विद्यालय हुआ करता था। कक्षा तीन एवं चार की शिक्षा उन्होंने देहरादून के मॉडल स्कूल से प्राप्त की। टिहरी से कक्षा सात एवं आठ की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने देहरादून के डीएवी इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया। इसी दौरान उनका संपर्क स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख जननायक श्रीदेव सुमन से हुआ। सुमन जी नियमित रूप से उनके देहरादून स्थित निवास पर आते और तत्कालीन राजशाही के अत्याचारों के विरुद्ध आंदोलन की रणनीतियों पर चर्चा करते थे।
उच्च शिक्षा के लिए कश्यप जी लाहौर गए। वहां उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ गणपत रोड, अनारकली बाजार में ‘वीर पुस्तक भंडार’ की स्थापना कर व्यवसाय प्रारंभ किया। इसके लिए उन्होंने अपने पिता से पांच हजार रुपये लिए थे। उन्होंने गरीब विद्यार्थियों तक सस्ती दरों पर पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं और कुंजियां उपलब्ध कराने तथा इनके प्रकाशन का महत्वपूर्ण कार्य किया। श्रीदेव सुमन भी उनसे मिलने लाहौर जाया करते थे।
राजशाही के अत्याचारों के विरुद्ध चले व्यापक जनआंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण स्व. कश्यप ने श्रीदेव सुमन के साथ टिहरी जेल में 13 माह 13 दिन बिताए। भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें टिहरी जेल से उत्तर प्रदेश की जेल में भी भेजा गया।
सादगीपूर्ण जीवन, सौम्य व्यवहार और खादी वस्त्रों के प्रति उनका विशेष अनुराग था। स्वतंत्रता आंदोलन के बाद भी उन्होंने अपना जीवन जनसेवा और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रखा। उनके प्रयासों से उत्तरकाशी नगर में गांधी आश्रम की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान मिला। लम्बगांव क्षेत्र में 30 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना तथा स्थानीय जनता से भूमि दान प्राप्त कर लम्बगांव में राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना में भी उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही।
स्व. कश्यप ने अपने पैतृक गांव में निजी भवन दान कर श्रीदेव सुमन की स्मृति में उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। क्षेत्र की गरीब जनता की सुविधा के लिए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के संचालन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रयास किए। अंतरिम सरकार के समय वे सेम-मुखेम क्षेत्र से विधायक भी चुने गए।

आयुर्वेद का अच्छा ज्ञान रखने वाले स्व. कश्यप लम्बगांव एवं चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क उपचार भी उपलब्ध कराते थे। उनका जीवन स्वतंत्रता संघर्ष, शिक्षा, सामाजिक सरोकार और जनसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण रहा।
पुण्यतिथि पर परिजनों ने नम आंखों से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों और सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया। उनके पुत्र जयवीर सिंह रांगड़ विक्रम भी अपने पिता के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं।
साईं सृजन पटल की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. नत्था सिंह कश्यप को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।




