ऋषिकेश(अंकित तिवारी) : विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर एम्स ऋषिकेश में आयोजित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को किडनी रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान बताया गया कि भोजन में नमक की मात्रा कम करके हम अपनी किडनी को खराब होने से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि भोजन में कम नमक का उपयोग हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने का प्रभावी तरीका है, जिससे किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
एम्स ऋषिकेश द्वारा किडनी रोगों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को संस्थान के गुर्दा रोग विभाग की ओपीडी क्षेत्र में नर्सिंग छात्राओं द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से किडनी को खराब होने से बचाने के उपायों और किडनी रोगियों के लिए उपयुक्त आहार के बारे में जानकारी दी गई।
ओपीडी में मौजूद रोगियों और उनके तीमारदारों को बताया गया कि किडनी हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करती है। गलत खान-पान और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण किडनी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भोजन में नमक की मात्रा न्यूनतम रखने से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
नाटक के दौरान विभिन्न संदेशों के माध्यम से लोगों को शराब और धूम्रपान से दूर रहने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि किडनी रोगियों को अपने आहार में संतुलन बनाए रखना चाहिए। अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डिब्बाबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन से बचना चाहिए तथा चीनी का सीमित उपयोग करना चाहिए, क्योंकि यह भी किडनी के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. शैरौन कंडारी, डॉ. दीपेश धुत और डॉ. साहिल सहित डायलिसिस यूनिट की एसएनओ अंजना, प्रह्लाद कुमार तथा नर्सिंग स्टाफ श्रुति, पूर्णिमा, शिवानी, महेन्द्र और सुनील मौजूद रहे। कार्यक्रम में नर्सिंग छात्राओं ने अपने प्रभावशाली अभिनय से किडनी स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश लोगों तक पहुंचाए, जिसे उपस्थित रोगियों और उनके परिजनों ने सराहा।






