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कर्णप्रयाग महाविद्यालय में वाणिज्य विभागीय परिषद का गठन, ‘विकसित भारत  2047’ पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

नितिन रावत अध्यक्ष और आयुष कंडारी उपाध्यक्ष मनोनीत, विद्यार्थियों ने पोस्टरों के माध्यम से व्यक्त की राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना

 

कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग के वाणिज्य विभाग में गुरुवार को विभागीय परिषद का गठन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत  2047’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।

विभागीय परिषद में एम.कॉम. तृतीय सेमेस्टर के नितिन रावत को अध्यक्ष, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर के आयुष कंडारी को उपाध्यक्ष, बी.कॉम. पंचम सेमेस्टर की दमयंती को सचिव, बी.कॉम. तृतीय सेमेस्टर की कृष्णा कंडवाल को सह-सचिव तथा बी.कॉम. प्रथम सेमेस्टर के अभिनिश को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।

परिषद की कार्यकारिणी में एम.कॉम. तृतीय सेमेस्टर की नैना, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर की अस्मिता रावत, बी.कॉम. पंचम सेमेस्टर की मोनिका, बी.कॉम. तृतीय सेमेस्टर के शुभम असवाल तथा बी.कॉम. प्रथम सेमेस्टर की कृतिका को सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

कार्यक्रम में वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. जी.सी. डंगवाल सहित विभाग के प्राध्यापक डॉ. के.के. पंत, डॉ. ममता भडोला जोशी, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. चंद्रपाल एवं श्री तरुण आर्य उपस्थित रहे। प्राध्यापकों ने विभागीय परिषद के गठन को विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, उत्तरदायित्व, संगठनात्मक कौशल एवं सामूहिक सहभागिता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

‘विकसित भारत  2047’ विषय पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को भारत के भावी स्वरूप, विकास की संभावनाओं तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने पोस्टरों के माध्यम से अपने विचारों और कल्पनाओं को अभिव्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

विभागीय परिषद के गठन और पोस्टर प्रतियोगिता के आयोजन से वाणिज्य विभाग की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा मिला। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नेतृत्व एवं जिम्मेदारी निभाने के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें विकसित भारत के संकल्प में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए प्रेरित करना रहा।

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