डोईवाला(अंकित तिवारी)। शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला में ‘भारत में तकनीकी विभाजन एवं सामाजिक असमानता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। महाविद्यालय डोईवाला के साथ राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जोशीमठ तथा राजकीय स्नातक महाविद्यालय, थत्यूड़ और बनबसा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस वेबिनार में विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका, सामाजिक असमानता तथा तकनीकी संसाधनों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. देवेश भट्ट ने की।
वेबिनार के मुख्य अतिथि उत्तराखंड उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र भसीन ने कहा कि डिजिटल तकनीक समाज की विभिन्न गतिविधियों और नीतिगत प्रक्रियाओं को गति देने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान एवं संसाधनों तक पहुँच को सुगम बना रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार माध्यमिक स्तर पर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए टैबलेट खरीदने हेतु धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से उनके खातों में हस्तांतरित की जाएगी। भविष्य में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को भी इस सुविधा से लाभान्वित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. भगवान सिंह बिष्ट ने कहा कि वर्तमान युग डिजिटल तकनीक का है। इसके प्रभावी उपयोग से विभिन्न कार्यों को अधिक सुगमता, दक्षता और प्रभावशीलता के साथ पूरा किया जा सकता है। उन्होंने तकनीकी संसाधनों के उपयोग को समय की आवश्यकता बताया।
बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ की समाजशास्त्र की प्रोफेसर जया श्रीवास्तव ने डिजिटल विभाजन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लैंगिक एवं जातिगत असमानताओं के साथ पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों तथा ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को तकनीकी सुविधाओं का समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता ने आधुनिक समाज में डिजिटल तकनीक, आर्थिक गतिविधियों और सूचना प्रौद्योगिकी की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने शोध कार्यों में डिजिटल तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीकी सुविधाओं का व्यापक और समान वितरण आवश्यक है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. देवेश भट्ट ने अतिथियों का स्वागत किया और उनका परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. संगीता बहुगुणा ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। वेबिनार का आयोजन समाजशास्त्र विभाग द्वारा किया गया। आयोजक सचिव के रूप में विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह पंवार एवं डॉ. राम सिंह सामंत ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सत्र की अध्यक्षता डॉ. पूनम भूषण ने की। तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. देवेश चंद्रा, डॉ. हर्ष नेगी, डॉ. अर्जुन रवि, डॉ. संगीता सिदोला एवं सोमेश्वर ने किया। वेबिनार की विस्तृत आख्या डॉ. चंद्रावती टम्टा ने तैयार की।
समापन सत्र में डॉ. शिव कुमार लाल ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वेबिनार की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि समाज के निम्न आय वर्ग और वंचित समुदायों को डिजिटल साक्षरता से जोड़े बिना गाँवों एवं शहरों के समग्र विकास की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती।
इस अवसर पर देवप्रयाग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एन. डी. शुक्ला सहित डॉ. नवीन कुमार नैथानी, डॉ. अंजली वर्मा, डॉ. पंकज पांडे, डॉ. संजीव नेगी, डॉ. संदीप बहुगुणा, डॉ. वी. पी. सेमवाल, डॉ. पल्लवी मिश्रा, डॉ. पार्वती रस्तोगी, डॉ. सीताराम नैथानी, डॉ. पुष्पा नेगी, डॉ. पूनम धस्माना, डॉ. चंद्रकला एवं डॉ. अमित नेगी समेत विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षाविद्, कर्मचारी और प्रतिभागी उपस्थित रहे।




