डोईवाला। हिमालय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे आधुनिक पहचान देने की दिशा में कार्य कर रहीं भोजपत्र कलाकार निकिता रावत को साईं सृजन पटल पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने उन्हें पत्रिका के नवीनतम अंक की प्रति भेंट कर उनके रचनात्मक कार्यों की सराहना की।
इस मौके पर पत्रिका के संपादक प्रो.(डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने कहा कि साईं सृजन पटल सदैव उन प्रतिभाओं को मंच देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि निकिता रावत का कार्य केवल कला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने यह भी कहा कि निकिता रावत ने भोजपत्र पर हस्तनिर्मित कला सृजन के माध्यम से इस विलुप्त होती कला को नई दिशा देते हुए उसे पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने कहा कि भोजपत्र, जो कभी ऋषि-मुनियों के ज्ञान लेखन का प्रमुख साधन हुआ करता था, आज पुनः जीवंत हो रहा है और इसमें निकिता रावत जैसी कलाकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार न केवल परंपरा को संरक्षित करते हैं, बल्कि युवाओं को भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आज उनके नवाचार और समर्पण के कारण भोजपत्र, जो कभी इतिहास के पन्नों तक सीमित हो गया था, पुनः आधुनिक बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है और हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
इस अवसर पर कलाकार निकिता रावत ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि हिमालय की उस प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करना है, जो समय के साथ विलुप्त होती जा रही थी। उन्होंने बताया कि भोजपत्र, जिस पर प्राचीन काल में वेद, शास्त्र और ग्रंथ लिखे जाते थे, आज आधुनिक कला और डिज़ाइन का माध्यम बन चुका है।
निकिता रावत ने साईं सृजन पटल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि पटल द्वारा उनके कार्य को पहचान मिलना न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि उन्हें भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित एवं प्रचारित करने के लिए प्रेरित करता है।







