धर्म-कर्म

हर शुभ अवसर पर एक पेड़ अवश्य लगायें : डाॅ. दुर्गेश आचार्य

देहरादून(अंकित तिवारी)। बद्रीपुर-जोगीवाला स्थित नाइन पाम्स रिसोर्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिवस पर राष्ट्रीय संत एवं प्रख्यात कथा वाचक डॉ. दुर्गेश ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि भोग-विलास में क्षणिक सुख अवश्य दिखाई देता है, किन्तु उसका परिणाम अंततः शून्य ही होता है। उन्होंने कहा कि अशुद्ध आहार और विचार मनुष्य के भीतर नकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा अनेक रोगों का मूल कारण भी बनते हैं।

व्यासपीठ से कथा श्रवण करा रहे डॉ. दुर्गेश ने कहा कि ऊंच-नीच, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और वासना समाज के लिए विष के समान हैं। मनुष्य को अपने अंतर्मन से इन विषैले भावों को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महापुरुषों और संतों के सान्निध्य से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा जिन संतों के हृदय में ज्ञान और प्रकाश होता है, उनके निकट रहने मात्र से व्यक्ति संस्कारवान बन जाता है।

उन्होंने कहा कि मन, कर्म और वचन की शुद्धता ही जीवन की वास्तविक साधना है। माता-पिता को अपने बच्चों को दीप प्रज्वलन, तिलक, अभिषेक और पूजन जैसे भारतीय संस्कार अवश्य सिखाने चाहिए। भगवान प्रकृति के कण-कण में विद्यमान हैं, आवश्यकता केवल शुद्ध दृष्टि की है।

पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए डॉ. दुर्गेश ने कहा कि प्रत्येक शुभ अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। पेड़-पौधे ही मानव जीवन के लिए प्राणवायु हैं। उत्तराखंड की पहचान उसके पर्वत, नदियां, ग्लेशियर, बुग्याल और हरित वन संपदा हैं, जिनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने गौसेवा को भी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन को गोकुल जैसा बना लें तो परम आनंद की अनुभूति संभव है।

कथा वाचक ने देवभूमि उत्तराखंड के सभी धामों और तीर्थस्थलों की पवित्रता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु हमारे अतिथि हैं और उनके माध्यम से देवभूमि का सकारात्मक संदेश विश्वभर में पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या को घोर पाप बताते हुए कहा कि यह ब्रह्महत्या से भी बड़ा अपराध है। बेटियां समाज की शान हैं और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का संदेश प्रत्येक परिवार को आत्मसात करना चाहिए।

मंडपाचार्य रमेश चंद्र पैन्यूली ने बताया कि यह दिव्य श्रीमद्भागवत कथा श्रीमती ऊषा नौटियाल द्वारा अपने स्वर्गीय पति भगवती प्रसाद नौटियाल की पुण्य स्मृति एवं समस्त पितरों की मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से 13 जून से आयोजित कराई जा रही है। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक चल रही है। 19 जून को पूर्णाहुति के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ. हरीश चंद्र रतूड़ी, हिमांशु, विपिन, विवेक, पंकज, मयंक नौटियाल, जगदीश प्रसाद, तेजराम, गोविंद राम, राकेश, कृष्ण स्वरूप नौटियाल, राजेश्वरी नौटियाल, रतनमणि नौटियाल, कुसुम, ओमप्रकाश डबराल, प्रीति एवं शेखर सकलानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों ने सभी भक्तजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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