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शिव के दिव्य अवतारों और रुद्राक्ष महिमा से शिवमय हुआ कथा पंडाल

श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर वीरभद्र, भैरव, वृषभ, शरभ और हनुमान के रुद्रावतार का किया वर्णन

देहरादून(अंकित तिवारी)। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर श्री सनातन धर्म मंदिर, नेहरू कॉलोनी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यासपीठ से श्रीधाम वृंदावन से पधारे पूज्य श्री पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज ने भगवान शिव के विविध कल्याणकारी स्वरूपों एवं दिव्य अवतारों के साथ रुद्राक्ष की महिमा का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को शिवभक्ति का संदेश दिया।

महाराज श्री ने भगवान शिव के वीरभद्र अवतार, भैरव स्वरूप, वृषभ अवतार, शरभ अवतार तथा हनुमानजी के रुद्रावतार स्वरूप से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि भगवान आशुतोष अपने भक्तों की रक्षा, अधर्म के विनाश और संसार के कल्याण के लिए समय-समय पर विभिन्न स्वरूप धारण करते हैं। भगवान शिव सच्ची और निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं तथा अपने भक्तों के कष्टों का हरण करते हैं।

शिव के अश्रुओं से हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

कथा के दौरान रुद्राक्ष की उत्पत्ति और उसकी महिमा का विशेष प्रसंग सुनाया गया। महाराज श्री ने बताया कि भगवान शिव के करुणामय अश्रुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति का पावन प्रसंग शिवभक्ति में विशेष महत्व रखता है। रुद्राक्ष केवल धारण करने की वस्तु नहीं, बल्कि भगवान शिव के स्मरण, साधना और सात्त्विक जीवन का प्रतीक है। श्रद्धापूर्वक रुद्राक्ष धारण कर शिवनाम का जप करने वाला साधक अपने जीवन को धर्म और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

उन्होंने कहा कि शिव और श्रीहरि में भेद की भावना नहीं रखनी चाहिए। सनातन परंपरा विभिन्न देवस्वरूपों में एक ही परम तत्त्व के दर्शन करना सिखाती है। अहंकार का त्याग, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान, जीवों के प्रति करुणा और भगवान के नाम का निरंतर स्मरण ही सच्चे धर्म की पहचान है।

जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

कथा के दौरान “हर हर महादेव”, “ॐ नमः शिवाय” और “बोल बम” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। भगवान शिव की मनोहारी झांकी और संगीतमय भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कथा के समापन पर भगवान शिव की भव्य आरती की गई। इस दौरान विश्व कल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और सभी श्रद्धालुओं के मंगल की कामना की गई। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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