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जैव विविधता संरक्षण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका: प्रो. अपर्णा नौटियाल

कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी)। डा. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में आयोजित उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला के अंतर्गत चौदहवां व्याख्यान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह के प्रेरक उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने इस व्याख्यान श्रृंखला के महत्व और विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर देशबंधु महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग  की प्रो. अपर्णा नौटियाल ने “उत्तराखंड में जैव विविधता के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में उन्होंने चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उसमें महिलाओं के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की महिलाओं ने न केवल जंगलों की रक्षा की, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

प्रो. नौटियाल ने उत्तराखंड की महिलाओं की दैनिक जीवनचर्या—जैसे जल, जंगल और जमीन से उनके गहरे जुड़ाव—को जैव विविधता संरक्षण का मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने ईकोफेमिनिज्म की अवधारणा का भी विस्तार से विश्लेषण किया और इसके सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी, टिकाऊ और परिणामदायी बनते हैं, जो सतत विकास की दिशा में एक सशक्त कदम है।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उन्हें समाज में उचित अवसर और सम्मान मिले, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

व्याख्यान के अंत में प्रो. नौटियाल ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन डा. इंद्रेश कुमार पाण्डेय द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।

ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों के अनेक शिक्षक एवं छात्र भी बड़ी संख्या में जुड़े रहे।

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