देहरादून(अंकित तिवारी): राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य ने श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव धर्म का पालन करते हुए धन अर्जित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी के शोषण अथवा अन्याय से कमाया गया धन कभी भी फलदायी नहीं होता। काम, क्रोध, मोह, लोभ तथा विभिन्न व्यसनों का त्याग करना ही श्रीमद्भागवत कथा की वास्तविक गुरुदक्षिणा है।
आचार्य ने कहा कि भगवान प्रेम के भूखे हैं और सच्ची भक्ति प्रेम, सेवा तथा सदाचार के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सामान्य गुरु से एक फल प्राप्त होता है, जबकि सद्गुरु से धर्म, सत्कर्म, ज्ञान और मोक्ष जैसे चार अमूल्य फल प्राप्त होते हैं। वेद, पुराण और उपनिषद ज्ञान का अथाह भंडार हैं तथा सनातन धर्म के प्रत्येक ग्रंथ में ऐसे सूत्र वाक्य विद्यमान हैं जो मानव जीवन को सदमार्ग की ओर अग्रसर कर सकते हैं।
कथा समापन के अवसर पर भजन प्रस्तुत करते हुए उन्होंने संदेश दिया कि जीवन स्वयं एक संगीत है, इसलिए “गुनगुनाते रहो, मुस्कराते रहो, काम करते रहो और नाम जपते रहो।” उन्होंने कहा कि तनावग्रस्त मन से भक्ति संभव नहीं है। सात दिवसीय कथा के दौरान भागवत की मूल कथा के साथ-साथ श्रद्धालुओं को जीवनोपयोगी एवं व्यवहारिक संदेश भी प्रदान किए गए।
अपने प्रवचनों में डॉ. दुर्गेश आचार्य ने पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा, नारी सम्मान, वसुधैव कुटुंबकम, चारधाम, सनातन धर्म, अतिथि सत्कार, नदियों एवं पर्वतों की स्वच्छता, प्लास्टिक उन्मूलन, मद्य निषेध, सात्विक एवं शुद्ध आहार, संस्कारयुक्त शिक्षा तथा वृद्धजनों के सम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ये सभी मूल्य एक आदर्श समाज और आदर्श राज्य की आधारशिला हैं।
शुक्रवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णाहुति एवं समापन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर व्यास पीठ से सभी यजमानों, सहयोगियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। मंडपाचार्य रमेश चंद्र पैन्यूली ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास में द्रोणनगरी में आयोजित इस कथा का पुण्यलाभ उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।
उल्लेखनीय है कि इस भागवत कथा का आयोजन ऊषा नौटियाल द्वारा अपने स्वर्गीय पति भगवती प्रसाद नौटियाल की पुण्य स्मृति एवं वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर कराया गया। वहीं शकुंतला नौटियाल के स्वर्गीय पति जगदम्बा प्रसाद नौटियाल को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल तथा डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अंत में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरीश चंद्र रतूड़ी ने कथावाचक आचार्य, समस्त सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।




