देहरादून(अंकित तिवारी)। श्रावण मास में श्री सनातन धर्म मंदिर, नेहरू कॉलोनी में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग श्रद्धा और उल्लास का केंद्र बन गया। व्यासपीठासीन पूज्य श्री पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज, श्रीधाम वृंदावन ने माता पार्वती की अटूट भक्ति, कठोर तपस्या से लेकर भगवान शिव के साथ उनके दिव्य विवाह तक की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। विवाह प्रसंग के दौरान पूरा कथा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से गूंज उठा।
महाराज श्री ने कहा कि माता सती ने पुनर्जन्म लेकर हिमालयराज और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। बाल्यकाल से ही उनका मन भगवान शिव में अनुरक्त था। शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ माता पार्वती ने सांसारिक सुखों का त्याग कर कठोर तपस्या की। उनकी अडिग साधना यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा और निष्काम भक्ति के सामने कठिन से कठिन साध्य भी संभव हो जाता है।
कथा में कामदेव दहन का प्रसंग भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। महाराज श्री ने बताया कि भगवान शिव के तृतीय नेत्र की अग्नि से कामदेव भस्म हुए। उन्होंने इसके आध्यात्मिक पक्ष को समझाते हुए कहा कि शिव तत्व मनुष्य को काम, क्रोध, मोह और अहंकार पर विजय पाने की प्रेरणा देता है।
इसके बाद शिव बारात और शिव-पार्वती विवाह का मनोहारी वर्णन हुआ। देवताओं, ऋषि-मुनियों और शिवगणों से सजी दिव्य बारात का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विवाह के मंगल अवसर पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया।




