कर्णप्रयाग(अंकित तिवारी) :। डॉ. शिवानन्द नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में मंगलवार को इतिहास विभाग की ओर से विभागीय परिषद का गठन करने के साथ भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
विभागीय परिषद के गठन में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या को अध्यक्ष, एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की बबीता जुयाल को सचिव, बी.ए. पंचम सेमेस्टर की अमीषा को कोषाध्यक्ष, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की रिया को उपाध्यक्ष तथा बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के मनीष को सह-सचिव चुना गया। वहीं, कक्षा प्रतिनिधियों के रूप में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर से प्रिया, एम.ए. प्रथम सेमेस्टर से भावना, बी.ए. पंचम सेमेस्टर से हिमानी, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर से राहुल मनराल और बी.ए. प्रथम सेमेस्टर से कनिष्का का चयन किया गया।
इस अवसर पर ‘भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखण्ड की विभूतियों का योगदान’ विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की सुप्रिया ने प्रथम, कनिष्का ने द्वितीय तथा एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, ‘इतिहास से संबंधित घटनाओं अथवा व्यक्तित्वों की चित्रकला’ विषय पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या राणा प्रथम, बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के सागर रावत द्वितीय तथा बी.ए. पंचम सेमेस्टर की अमीषा तृतीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका डॉ. कविता पाठक, डॉ. मदन लाल शर्मा एवं डॉ. कीर्तिराम डंगवाल ने निभाई।
प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शक भी है। उत्तराखण्ड की धरती वीरों और महान विभूतियों की धरती रही है। उनके योगदान और बलिदान से परिचित होना प्रत्येक युवा का कर्तव्य है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति, तार्किक क्षमता और अपनी जड़ों से जुड़ाव विकसित करती हैं।
इतिहास विभाग की प्रभारी डॉ. कामना लोहनी ने कहा कि विभागीय परिषद का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता एवं संगठनात्मक कौशल विकसित करना है। इतिहास को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर भाषण और चित्रकला जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जीवंत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ने के प्रयास जारी रहेंगे।
कार्यक्रम का संचालन पूनम ने किया, जबकि स्वाति सुन्दरियाल ने अतिथियों, निर्णायक मंडल एवं छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर प्राचार्य ने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में इतिहास विषय के 204 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।






