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जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद को आगे आए सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. जी.आर. सेमवाल, साईं सृजन पटल के बुक बैंक को भेंट कीं 119 पुस्तकें

अंग्रेजी साहित्य की पुस्तकों के साथ ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ की 55 प्रतियां भी कीं भेंट, बुक बैंक में पहुंचा पुस्तकों का आंकड़ा 400 के पार

देहरादून/डोईवाला। जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में साईं सृजन पटल की पहल ‘पुस्तक भेंट-सर्वश्रेष्ठ’ अभियान को लगातार सहयोग मिल रहा है। इसी क्रम में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर से सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. गोविंद राम सेमवाल ने बुधवार को पटल के बुक बैंक को अंग्रेजी साहित्य की 119 पुस्तकें भेंट कीं।

साईं सृजन पटल के संस्थापक एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. के.एल. तलवाड़ ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों की शैक्षिक सहायता के उद्देश्य से इस वर्ष 15 अगस्त को बुक बैंक की स्थापना की गई थी। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकतानुसार निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभियान के तहत अब तक डॉ. हरीश चंद्र रतूड़ी, प्रो. राजेश कुमार उभान, प्रो. डी.डी. मैठाणी, जी.सी. पंत, स्वाति भंडारी सहित कई शिक्षाविदों ने पुस्तकें भेंट कर इस पुनीत पहल में योगदान दिया है।

पटल के सहयोगी अंकित तिवारी ने बताया कि बुक बैंक में अब तक लगभग 400 पुस्तकें एकत्रित हो चुकी हैं। इनमें वाणिज्य, अर्थशास्त्र, भूगोल, अंग्रेजी साहित्य तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित उपयोगी पुस्तकें शामिल हैं। बुक बैंक के माध्यम से विद्यार्थियों को पुस्तकें भेंट करने का विधिवत कार्यक्रम 2 अक्टूबर से प्रारंभ हो चुका है।

इस अवसर पर प्रो. सेमवाल द्वारा अनूदित पुस्तक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम – ए क्लासिक प्ले ऑफ कालिदास’ की 55 प्रतियां भी बुक बैंक को भेंट की गईं। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश चंद्र जोशी ने बताया कि यह पुस्तक एम.ए. अंग्रेजी के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। इन पुस्तकों को भी शीघ्र ही विद्यार्थियों को भेंट किया जाएगा।

उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र भसीन ने साईं सृजन पटल की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए पुस्तक भेंट अभियान के लिए संस्थापक एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने इसे जरूरतमंद विद्यार्थियों तक ज्ञान और शिक्षा के संसाधन पहुंचाने की सराहनीय पहल बताया।

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