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कर्णप्रयाग महाविद्यालय में ‘पठन-पाठन की संस्कृति और वर्तमान वर्चुअल समय’ विषय पर व्याख्यान आयोजित

कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी)। डा. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में उच्च शिक्षा व्याख्यानमाला का छठा व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह के उद्बोधन से हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय महाविद्यालय चुड़ियाला के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. विपिन शर्मा ने ‘पठन-पाठन की संस्कृति और वर्तमान वर्चुअल समय’ विषय पर विस्तृत रूप से अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भूमंडलीकरण के प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि सूचना प्रसारण के माध्यमों में समय के साथ हुए क्रांतिकारी परिवर्तनों ने हमारे दैनिक जीवन को किस हद तक प्रभावित किया है। डॉ. शर्मा ने आधुनिक युग में पठन-पाठन की संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि इसके द्वारा नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं।

उन्होंने विभिन्न तकनीकी उपकरणों और ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर भी चर्चा की और यह बताया कि कैसे वर्चुअल शिक्षा व्यवस्था भविष्य में शैक्षिक प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। इस व्याख्यान में उपस्थित छात्रों और शिक्षकों ने अंत में अपनी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका उत्तर डॉ. शर्मा ने सहृदयता से दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. इंद्रेश कुमार पांडेय ने किया। इस ऑनलाइन मोड में आयोजित व्याख्यान में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण सहित अन्य महाविद्यालयों से भी अनेक प्राध्यापक और छात्र जुड़े। कार्यक्रम के अंत में डॉ. कविता पाठक ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह व्याख्यान महाविद्यालय में पठन-पाठन की संस्कृति के महत्व और वर्चुअल शिक्षा के प्रभावों पर विचार करने का एक अद्वितीय अवसर साबित हुआ।

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