नई दिल्ली(अंकित तिवारी)। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में हिमालय विरासत ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री ,पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को उनकी उत्कृष्ट कहानियों के लिए प्रतिष्ठित ‘कथा सम्राट सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह आयोजन डॉ. निशंक की कहानियों पर केंद्रित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “रविवारीय कहानी वार्ता” के सफल तीन वर्ष एवं 150 सप्ताह पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
वर्ष 2023 से प्रत्येक रविवार आयोजित हो रही यह ऑनलाइन साहित्यिक श्रृंखला हिंदी साहित्य में एक सशक्त सांस्कृतिक अभियान के रूप में स्थापित हो चुकी है। इस मंच के माध्यम से देश-विदेश के साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं हिंदी प्रेमियों ने डॉ. निशंक की कहानियों पर गंभीर साहित्यिक विमर्श प्रस्तुत किए हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं पुष्पगुच्छ भेंट के साथ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. के. जी. सुरेश ने कहा कि “रविवारीय कहानी वार्ता” ने साहित्यिक संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि डॉ. निशंक की कहानियों में पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, संघर्ष, पीड़ा और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सजीव चित्रण दिखाई देता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. वरुण कुमार गुलाटी ने कहा कि डॉ. निशंक के साहित्य पर 150 श्रृंखलाओं तक निरंतर चलने वाली यह साहित्यिक यात्रा अपने आप में ऐतिहासिक और अद्भुत है। उन्होंने घोषणा की कि 200वीं श्रृंखला पूर्ण होने पर साहित्य अकादमी स्वयं विशेष आयोजन करेगी।
समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि एवं पद्मश्री सम्मानित अशोक चक्रधर ने की। उन्होंने डॉ. निशंक की चर्चित कहानी ‘विपदा जीवित है’ का प्रभावशाली पाठ किया और कहा कि यह कहानी पत्रकारिता के मूल धर्म एवं मानवीय दायित्वों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।
इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी साहित्यिक यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका लेखन जीवन संघर्षों और सामाजिक सरोकारों से प्रेरित रहा है। उन्होंने सभी साहित्यकारों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए “रविवारीय कहानी वार्ता” को हिंदी साहित्य में संवाद और संवेदनाओं की सशक्त पहल बताया।
कार्यक्रम में डॉ. अनिल जोशी, डॉ. जवाहर कर्णावत, डॉ. बेचैन कंडियाल, पं. सुरेश नीरव, डॉ. दर्शन पांडे तथा प्रो. श्रीनिवास त्यागी सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वेद प्रकाश ने किया, जबकि अंत में हिमालय विरासत ट्रस्ट की अध्यक्ष आश्ना कंडियाल नेगी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह में डॉ. किरण खन्ना, डॉ. दर्शनी प्रिय, डॉ. अनिरुद्ध कुमार, डॉ. रवि कुमार गोंड, डॉ. भारती आनंद ‘अनंता’ तथा प्रो. सुशील कुमार शर्मा सहित देश के अनेक राज्यों से आए साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं हिंदी प्रेमी उपस्थित रहे।






