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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने मणिगुह गांव में जगाई विकास और शिक्षा की नई अलख

शिक्षा, कौशल विकास, जैवविविधता संरक्षण और स्वरोजगार पर ग्रामीणों को किया जागरूक

कर्णप्रयाग/अगस्त्यमुनि(अंकित तिवारी)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के कर्णप्रयाग क्षेत्रीय केंद्र द्वारा गोद लिए गए ग्राम मणिगुह में मंगलवार को पंचायत घर में एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर शिक्षा, कृषि, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान माणिक लाल ने की। इस अवसर पर ग्राम प्रधान एवं पुस्तकालय संचालक महेश नेगी ने विश्वविद्यालय से आए प्रतिनिधियों का पारंपरिक स्वागत एवं सम्मान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की सहायक क्षेत्रीय निदेशक प्रियंका लोहानी ने विश्वविद्यालय की “गोद लिए गए गांव” अवधारणा की जानकारी देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गांव के समग्र विकास के लिए कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि “शिक्षा हर समस्या और हर चुनौती का सबसे प्रभावी समाधान है। शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकता है।”

मानविकी विद्याशाखा के निदेशक प्रो. गिरीजा पांडेय ने ग्रामीण युवाओं को विश्वविद्यालय के व्यावसायिक प्रमाणपत्र एवं डिग्री पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा अंगीकृत गांवों के विकास मॉडल, योजनाओं एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए मणिगुह गांव में उपलब्ध प्राकृतिक एवं सामाजिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर बल दिया।

प्रो. पांडेय ने ग्रामीणों को असिस्टेंट होम-स्टे मैनेजर पाठ्यक्रम की जानकारी देते हुए इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से पर्यटन एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. एस.एन. ओझा ने गांव की समृद्ध जैवविविधता, औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सतत उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को जैवविविधता पब्लिक रजिस्टर (पीबीआर) की उपयोगिता बताते हुए कृषि विकास में प्रगतिशील किसानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। साथ ही औषधीय पौधों के विपणन एवं आर्थिक उपयोग की संभावनाओं से भी अवगत कराया।

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक विकास को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।

कार्यक्रम के अंत में ग्राम प्रधान ने सभी अतिथियों, विश्वविद्यालय परिवार एवं उपस्थित ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।

यह कार्यक्रम शिक्षा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ग्रामीण विकास, महिला जागरूकता, कृषि उन्नयन, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।

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